
खरगोन. जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर पहाड़ी में बसा है छोटा सा गांव खेरकुंडी टूटी-फूटी पगडंडियों और आड़े-तिरछे कच्चे रास्ते। फालियों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोगों के झोपड़ों में न बिजली है,न पानी की सुविधा। एक सप्ताह पहले तक कोई इस गांव का नाम तक नहीं जानता था, पर इन दिनों गांव में फिल्म 'पीपली लाइव' जैसा नजारा है।
रोज नेताओं-अफसरों की रेलमपेल लगी है। सड़क बनाई जा रही है। अफसर घरों में बिजली और पानी पहुंचाने की मशक्कत कर रहे है। अचानक आई सोगातों की इस 'बाढ़' से ग्रामीण हैरान है। दरअसल, ये सब हो रहा है गांव में रहने बाले बिशन पिता हाबू की 6 सितंबर को न्यायिक हिरासत में मौत के बाद उपजे आक्रोश को थामने के लिए।
पीपली लाइव में क्या ?
फिल्म में पीपली के किसान नत्थू सिंह को डर सताता है कि कर्ज न चुकाने से जमीन पर सरकार कब्जा कर लेगी। जब उसे पता चलता है कि सरकार उन किसानों के परिवार को मुआवजा देगी, जो कर्जन चुकाने की वजह से आत्महत्या करते हैं। नत्था द्वारा आत्महत्या करने के ऐलान की खबर सनसनी बन जाती है, वहीं, सरकार के लिए मुसीबत। और गांव में नेताओं, अफसरों, मीडिया का मजमा लग जाता है।
नेता-अफसरों के दौरे
प्रशासन पीड़ित परिवार को दो लाख रुपए उपलब्ध करवा चुका है। रेडक्रॉस से 25 हजार रुपए की मदद तुरंत दे दी गई। भाजपा सांसद, जयस के नेताओं के साथ कांग्रेस का विधायक दल भी गांव का दौरा कर चुका है।
24 घंटे बिजली पानी
क्षेत्र में 24 घंटे बिजली सप्लाई देने की कवायद की जा रही है। जेई देवानंद मालवीय ने बताया कि इस कार्य में अनुमानित 10 लाख की राशि व्यय होगी। पेयजल के लिए भी पाइपलाइन बिछाने की कवायद हो रही है।
क्या है मामला
लूट के आरोप में अन्य साथियों के साथ पकड़े गए बिशन की कथित रूप से पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी। उसके शरीर पर घाव के निशान भी मिले थे। बिशन की मौत की न्यायिक जांच चल रही है।
सरकार ने खरगान एसपा का हटाया
सरकार ने खरगोन एसपी शैलेन्द्र सिंह चौहान को हटा दिया है। जिले के बिस्टान में आदिवासी की मौत के बाद स्थिति को सही ढंग से नहीं संभालने के कारण सरकार ने यह कार्रवाई की है। इसके पहले यहां के पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इस पूरे मामले की न्यायिक जांच के निर्देश दिए गए हैं।
Published on:
13 Sept 2021 10:47 am

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