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खाटू श्याम के लिए 800 किमी पैदल चले, पालतू श्वान ने भी की रोज 40 किमी की पदयात्रा

खाटू श्याम की पैदल यात्रा का ओंकारेश्वर में हुआ समापन, लगाए जयकारे, रथ के साथ चलते रहे श्रद्धालु

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खाटू श्याम की पैदल यात्रा

बड़वाह. खाटू श्याम के दर्शन के लिए कौन बेताब नहीं रहता पर ये भक्त अनूठे हैं। इन्होंने भगवान के दर्शन के लिए कई सौ किमी की पैदल यात्रा की। खाटू श्याम की इस पदयात्रा में एक पालतू श्वान भी शामिल हुआ। श्री श्याम वल्लभ सेवा समिति के तत्वावधान में 25 मई को निकली इस पदयात्रा का ओंकारेश्वर में समापन हुआ।

श्री श्याम वल्लभ सेवा समिति ने खाटू श्याम मंदिर मंदसौर के आशीष शर्मा पुजारी के मार्गदर्शन में यह यात्रा निकाली। करही के निलेश गोस्वामी, बड़वाह के गोपाला काले सहित 28 श्याम भक्त इस पद यात्रा में शामिल हुए। इस यात्रा में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। हाथों में श्रद्धा का ध्वज निशान और जय श्री श्याम के जयकारे के साथ ये लोग मई जून की भीषण गर्मी में भी पैदल चलते रहे।

तेज धूप में खाटू श्याम के इन भक्तों ने 800 किमी की पदयात्रा की। पैदल चलते हुए ये यात्री 24 जून को राजस्थान के सीकर जिले के खाटू पहुंचे। यहां बाबा श्याम को ध्वज निशान अर्पित कर वापस ओंकारेश्वर पहुंचे जहां यात्रा का समापन हुआ। खाटू श्याम भक्तों ने नर्मदा रोड पर आतिशबाजी और ढोल ढमाकों के साथ पुष्प वर्षा कर बाबा की आगवानी की।

खाटू श्याम पदयात्री नीलेश गोस्वामी ने बताया कि कोरोनाकाल में श्याम भक्तों ने यह संकल्प लिया गया था कि करही, बड़वाह से यात्रा करते हुए खाटू श्याम दरबार मन्नत को पहुंचेंगे। कोरोना समाप्त होने पर 25 मई को रवाना हुए और एक महीने में श्याम दरबार में हाजरी लगाई।

गोपाला काले ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 किलोमीटर की यात्रा की। रात्रि में खाटू श्याम के भक्तों ने सभी व्यवस्था की। एक पालतू श्वान भी यात्रा में साथ चल रहा था। यात्रा में खाटू शायम की झांकी और रथ का जगह.जगह श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया।

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