
पाडल्या में हरियाली से लदे पहाड़। आड़ी-तिरछी पगडंडियों वाला रास्ता। और कठिन डगर। यह सफर है विंध्याचल पर्वत की गोद में बसे छोटा अमरनाथ के नाम से प्रसिद्ध महादेव खोदरा का। श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा के आगे यहां की कठिन चढ़ाई भी बौनी लगती है। सावन सोमवार को यहां भक्तों का जमावड़ा लग रहा है। रास्ते किसी भूलभूलैया से कम नहीं। लेकिन जब से नेटवर्क की समस्या खत्म हुई है श्रद्धालु यहां गुगल मैप के जरिए पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालु लोकेश नामदेव, कमल राठौड़, अजय पाटीदार, पंकज चौकड़े आदि ने बताया छोटा अमरनाथ महादेव खोदरा में मोबाइल नेटवर्क मिलने लगा है। अब नए श्रद्धालुओं को वहां पहुंचने और भगवान शिव के दर्शन करने में ज्यादा परेशानी नहीं होती। पहले यहां नेटवर्क नहीं मिलने व रास्तों का सही ज्ञान न होने से भटकने का अंदेशा बना रहता था। यहां मैप के जरिए पहुंचा जा रहा है। यह दार्शनिक स्थल पाडल्या से 14 किमी दूर ग्राम रोशियाबारी के पास विंध्याचल पर्वत की गोद में बीचों बीच स्थापित है। श्रद्धालु इसे छोटा अमरनाथ महादेव भी कहते हैं।
करही पाडल्या से 10 किमी दूर रोशियाबारी गांव तक सड़क मार्ग है। यहां तक बाइक, कार पहुंचती है। वहां से पैदल श्रद्धालुओं को महादेव खोदरा पहुंचने के लिए करीब चार किमी पहाड़ी रास्ते से भक्त गुजरते हैं। एक किमी मार्ग समतल व तीन किलो मीटर चढ़ाई में पगडंडी नुमा है। रोशियाबारी से महादेव खोदरा तक विंध्याचल के पहाड़ में 4 किलो मीटर के जंगल मार्ग में जगह जगह केसरिया पताका व पेड़ों पर दिशा संकेतक लगे हैं। इससे शिवभक्तों को गुफा तक पहुंचने में आसानी होती है।
इसलिए खास
यहां प्राचीन गुफा में स्थापित शिवलिंग लोगों की आस्था का केंद्र बिंदू है। इसके अलावा पेड़-पौधों और बहते झरनों का आकर्षण भी यहां श्रद्धालुओं को खींचकर लाता है। पहाड़ी पगडंडियों से होकर महादेव तक पहुंचने श्रद्धालुओं के जयघोष से जंगल भी गूंजायमान हो रहा है।
शिवलिंग पर रोज चढ़े मिलते हैं फूल, बिल्वपत्र
महादेव खोदरा गुफा मंदिर अतिप्राचीन है । नगर के सुरेश कानूनगो (78), श्यामलाल राठौड़ (75), रामदढ़ के काना चारण (70 ) आदि बुजुर्गो ने बताया इस गुफा के अंदर विराजित शिवलिंग पर रोज ताजे फूल, बिलपत्र चढ़े मिलते हैं। जैसे की भगवान शिव जी की किसी ने अल सुबह से पूजा अर्चना की हो।
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महादेव खोदरा
करही नगर से 8 किलोमीटर दूर गांव रोशयाबारी में दुर्गम पहाड़ी (विध्यांचल पर्वत) पर गुफा में पवित्र शिवलिंग स्थापित है। इस जगह को महादेव खोदरा नाम से जाना जाता है। इसी प्राचीन मंदिर को लेकर कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित है। सावन में प्राचीन शिवलिंग लोगों की श्रद्धा व आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के लिए रास्ता पथरीला और फिसलन वाला होने के कारण कई श्रद्धालु गुफा के दर्शन से वंचित थे। मंदिर में गुफा के अंदर प्रवेश करते ही सबसे पहले नाग नागिन के जोड़े के दर्शन होते हैं। साल भर श्रद्धालुओं दर्शन लिए आते हैं।
नन्हेश्वर महादेव
भगवानपुरा में महर्षि मार्केंडेय ऋषि की तपोस्थलीनन्हेश्वर धाम शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पूरे समय पानी में डूबा रहता है। नन्हेश्वर धाम में महर्षि मार्केंडेय ऋषि 21 कल्प के बाद अमर हुए थे, तभी से यह स्थल पवित्र कहलाता है। 1333 ईसवीं से जल मंदिर में स्थित हाटकेश्वर भगवान का मंदिर खंडित है जिसका निर्माण चल रहा है।
नीलकंढेश्वर महादेव
मंदिरों की नगरी के नाम से प्रख्यात ऊन में कई प्राचीन मंदिर है। ग्राम में राजा बल्लाल द्वारा 13वीं शताब्दी में 99 मंदिरों का निर्माण कराया गया था। यहां नीलकठेश्वर महादेव मंदिर आदिकाल की कला का अद्भूत उदाहरण है। मंदिर में पार्थिव शिवलिंग का ऊपरी हिस्सा अतिप्राचीन नीले पत्थर से निर्मित है इसलिए यहां विराजित शिवलिंग को नीलकंठेश्व महादेव कहा जाता है। वहीं जमीनी गफा में पाताल में निर्मित हटकेश्वर महादेव मंदिरभी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह स्थान महाकालेश्वर मंदिर की उज्जैन स्थित महाकाल के समान महत्ता रखता है।
Updated on:
31 Jul 2023 07:19 pm
Published on:
31 Jul 2023 07:18 pm
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