
सोनोग्राफी सेंटर्स को नि:शुल्क जांच के आदेश
खरगोन. अब प्राइवेट सेंटर्स पर भी निशुल्क सोनोग्राफी होगी। इसके लिए कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिए हैं हालांकि प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटर्स के संचालकों ने मुफ्त जांच से इनकार कर दिया है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए लंबी वेटिंग और मरीजों के लोड को देखते हुए कलेक्टर शिवराजसिंह वर्मा ने दस निजी सेंटरों पर नि:शुल्क जांच के आदेश दिए थे। इस आदेश से निजी लैब संचालक सहमत नहीं हैं और उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए जांच से हाथ खड़े कर दिए।
मरीजों की निशुल्क सोनोग्राफी के आदेश में प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटरों के अपने निजी स्वार्थ आड़े आ रहे हैं। ऐसे में कलेक्टर के आदेश पर अमल नहीं हो पाया है। दूसरी ओर जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए परेशान होते देखा जा सकता है। शनिवार को जिला अस्पताल में सोनोग्राफी सेंटर बंद रहा। डॉक्टर छुट्टी पर थे।
उल्लेखनीय है कि 4 फरवरी को जिला अस्पताल निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर ने जब सोनोग्राफी सेंटर के बाहर बैठी महिलाओं को देखा, तो उन्होंने सीएमएचओ डॉ. डीएस चौहान और सिविल सर्जन डॉ. अमरसिंह चौहान को निजी सोनोग्राफी सेंटरों पर निशुल्क जांच के निर्देश दिए थे। इसके संबंध में गत दिनों 10 सेंटरों को (प्रत्येक को तीन) एएनसी सोनोग्राफी नि:शुल्क करने के आदेश दिए थे। किंतु निजी सोनोग्राफी संचालकों ने सीएमएचओ कार्यालय में पत्र देकर जांच करने में असमर्थता जताई। इसके पीछे अपने व्यवसायिक अधिकारों का हनन और आर्थिक नुकसान की दुहाई दी गई।
जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच करना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि यहां एक दिन भी डॉक्टर छुट्टी जाते हैं, तो पूरी व्यवस्था बिगड़ती है। अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 120 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए पहुंची है। अस्पताल में एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सत्यम तारे है, जो लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं। उनके मुताबित प्रतिदिन 70 से 80 जांचें होती है। शासन का नियम 25 से 30 का है। इस हिसाब से तीन गुना जांच सरकारी अस्पताल में हो रही है। फिर भी कई मरीज छूट जाते हैं, जिन्हें वेटिंग के साथ लंबा इंतजार करना पड़ता है।
नि:शुल्क जांच की सुविधा अभी केवल जिला अस्पताल में है। जहां जिलेभर से गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती है। इनके लिए बाजार में जांच करना महंगा होता है। प्राइवेट सोनोग्राफी सेंटरों पर एक जांच के 800 से 1000 रुपए फीस वसूली जा रही है। यदि कलेक्टर के आदेश पर अमल होता है तो एक दिन में 30 महिलाओं की नि:शुल्क जांच होगी जिससे गरीबों के प्रतिदिन 30 हजार रुपए बचेंगे।
निजी संचालकों ने जताया विरोध
प्राइवेट में नि:शुल्क जांच के पहले ही निजी संचालकों द्वारा विरोध दर्ज कराते हुए जांच से इनकार किया है। इस संबंध में वरिष्ठ चिकित्सक और निजी सोनोग्राफी सेंटर डॉ. गोविंद मुजाल्दे का कहना है कि जिला अस्पताल में सुविधाएं और डॉक्टर हैं, तो फिर क्यों जांच नहीं हो रही। प्राइवेट में नि:शुल्क जांच करना हमारे अधिकारों का हनन है।
महिला रोग विशेषज्ञों से जांच कराएं
निजी सोनोग्राफी केंद्र संचालकों का कहना है कि जिला चिकित्सालय में यदि रेडियोलॉजिस्ट और सोनोग्राफी चिकित्सक नहीं है तो एएनसी महिलाओं की सोनोग्राफी महिला रोग विशेषज्ञों से करवाना चाहिए। यहां की तीन महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रशिक्षण भी लिया है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत उनका नाम रजिस्टर्ड भी है।
इधर जिला अस्पताल खरगोन के सिविल सर्जन डॉ. अमरसिंह चौहान के अनुसार गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी के लिए रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर होना चाहिए। हमारे पास एक ही डॉक्टर है। इसकी तुलना में मरीजों का लोड है। गायनिक डॉक्टर प्रोफेशनली ट्रेंड नहीं होती है। उन्हें सिर्फ 15 दिन का प्रशिक्षण मिला है।
Published on:
26 Feb 2023 01:37 pm
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