
लंबे समय से खुले में पड़े बोरे फटने लगे है।
खरगोन.
कोरोना काल में कई गरीब और मजदूरों दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हुई। लेकिन सरकार की नजर में इसकी कोई कीमत नहीं है। किसानों से खरीदे गए सरकारी गेहूं को सुरक्षित रखने में लापरवाही बरती जा रही है। खंडवा-बड़ौदा हाइवे पर ऊन के समीप ओपन केप में 24 हजार मीट्रिक टन गेहूं पिछले 15 महीनों से खुले में पटक रखा है। गतवर्ष सरकार ने 1950 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की। इस हिसाब से 46.80 करोड़ का गेहूं है, जिसे लावारिस मानकर खुले में छोड़ दिया है। इस गेहूं में अब घुन और कीड़े लग चुके हैं। बड़ी मात्रा में गेहूं खराब हो चुका है। बोरों से घुन व कीड़े और पाउडर निकल रहा है। इस लापरवाही छुपाने के लिए अफसरों के निर्देश पर फमिगेट नामक कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 17 जुलाई से यह काम मजदूरों की मदद से हो रहा है। सोमवार को पत्रिका टीम यहां पहुंची, तो जिम्मेदारों की पोल खुल गई। मौके पर मौजूद कोई भी अधिकारी व कर्मचारी सीधे मुंह यह बताने के लिए तैयार नहीं था कि भंडारित गेहूं में कितना अनाज खराब हुआ है। मालूम हो कि धार और उज्जैन जिले से बड़ी मात्रा में गेहूं परिवहन कर ऊन, टेमला और भीकनगांव में ओपन केप में रखा गया है। जिसके सुरिक्षत भंडारण और उठाव के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
15 जुलाई को टीम ने किया था निरीक्षण
भंडारित गेहंू की जांच करने 15 जुलाई को राज्यस्तरीय टीम पहुंची थी। जिसमें फूट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया, नागरिक आपूर्ति निगम, स्टेट वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन और जिला आपूर्ति अधिकारी शामिल थे। शुरुआती जांच के दौरार भंडारित में गेहंू घुन व कीड़े लगने की बात सामने आई थी। टीम ने सेंपल लिए थे। जिसकी जांच भोपाल स्तर पर कराने की बात कही थी। इसके दो दिन बाद खराब गेहूं को अलग करने की प्रक्रिया चल रही है। जिला विपणन अधिकारी ऋत्विक टेंभरे ने नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधन संचालक के आदेश पर खराब और अच्छे गेहूं को अलग किया जा रहा है। साथ ही दिमक, कीड़े को मारने के लिए कीटनाशक दवाई डाली जा रही है। एफएक्यू के मापदंडों के अनुसार जो गेहूं अच्छा होगा। उसे सुरक्षित रखा जाएगा।
हर महीने लिखी चि_ी, नहीं हुई सुनवाई
अधिकारिक सूत्रों की मानें तो गेहूं के उठाव के लिए जिला प्रशासन और विपणन विभाग द्वारा हर महीने शासन को पत्र लिखे गए। अब तक 15 बार चिट्टी लिखी गई। लेकिन शासन स्तर से कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके उल्ट खुले में रखे गेहूं की देखरेख और सुरक्षा में लगभग दस लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले में कहा कितना गेहूं रखा
-24 हजार मीट्रिक टन ऊन में
-250 मीट्रिक टन टेमला में
-250 मीट्रिक टन भीकनगांव में
उठाव के आदेश नहीं
वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशानुसार ओपन केप में रखें गेहंू को पृथक किया जा रहा है। एफएपक्यू के मापदंड अनुसार जो गेहूं अच्छा है, उसे सुरक्षित रखा जाएगा। उठाव के लि अभी आदेश नहीं आए हैं।
ऋत्विक टेम्भरे, जिला विपणन अधिकारी खरगोन
चर्चा करेंगे
यह सही है कि लंबे समय से गेहंू को खुले में नहीं रखा जा सकता। पूर्व में शासन से बात हुई थीं। राशन दुकानों के माध्यम से वितरण के लिए चर्चा करेंगे।
गजेंद्र पटेल, सांसद खरगोन-बड़वानी
Published on:
27 Jul 2021 01:33 pm
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