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नए अध्यादेश का असर: एशिया की नंबर दो मिर्ची मंडी को राजस्व का भारी नुकसान

मंडी के बाहर ही खरीदी कर रहे व्यापारी, प्रबंधन के पास रोकने का अधिकार नहीं

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red mirch mandi

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खरगोन. जिले का बेडिय़ा क्षेत्र। यह इलाका लाल मिर्ची की खरीद-बिक्री के लिए जिले ही नहीं देश और विदेशों में भी फेमस है। यहां की मिर्ची यूरोप, पश्चिम बंगाल, पाकिस्तान सहित देश के कई प्रांतों में सप्लाय की जा रही है, लेकिन इस वर्ष यहां के कारोबार पर ऐसा ग्रहण लगा है कि राजस्व औंधे मुंह गिर गया। बीते साल बेडिय़ा मिर्ची मंडी में 3 करोड़ 51 लाख 56 हजार का राजस्व मिला, लेकिन इस साल स्टॉफ की चाय का खर्चा भी नहीं निकला है। 6 जून को मंडी अध्यादेश जारी होने के बाद व्यापारी व किसान स्वतंत्र हो गए। मंडी टैक्स से बचने के लिए व्यापारियों ने मंडी के बाहर उपज खरीदी और इसका सीधा नुकसान मंडी राजस्व को हुआ है।

बेडिय़ा मिर्ची मंडी के प्रभारी सचिव बलिराम बिर्ला ने बताया मंडी अध्यादेश के बाद यह नियम लागू हुआ कि किसान अपनी उपज कहीं भी बेच सकता है। इस आदेश के बाद उन्होंने मंडी आना बंद किया। इस अध्यादेश का फायदा लाइसेंसी व्यापारियों ने भी उठाया। 1.50 रुपए मंडी टैक्स से बचने के लिए व्यापारियों ने उपज की खरीदी मंडी के बाहर ही की। लिहाजा वर्ष 2020 में मंडी का मिर्ची कारोबार धड़ाम से नीचे आ गया।

प्रभारी सचिव ने बताया राजस्व न मिलने की वजह से कर्मचारियों का वेतन निकालना मुश्किल हो गया है। बेडिय़ा मंडी में एक सचिव, पांच सहायक उपनिरीक्षक, दो बाबू (वर्ग तीन) व दो प्यून कार्यरत हैं। जिस हिसाब से अब तक मिर्ची की आवक को लेकर हालात बने हैं उससे यह लग रहा है कि आगे कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल होगा। प्रभारी सचिव ने बताया बेडिय़ा मंडी के लिए मरदलिया के पास नया परिसर बनकर तैयार है, लेकिन इसे अभी शुरू नहीं किया गया। इसे लेकर एमडी व संबंधित अफसरों को कई बार पत्र व्यवहार भी कर चुके हैं। स्थाई मंडी के अभाव में अभी पुराने स्थान पर ही कारोबार कर रहे हैं। आवक न होने का यह भी एक बड़ा कारण है। स्थाई मंडी मिलने के बाद किसान आएंगे। निमाड़ की मिर्च अपने तीखेपन के लिए प्रसिद्ध है। इसका तड़का जिले में ही नहीं देश के अन्य प्रांतों व विदेशों तक फेमस है। यहां की मिर्ची का ट्रांसपोर्ट यूरोप, पाकिस्तान, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र आदि जगह किया जाता है।

हमारे सामने बाहर बिकती उपज, देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं
मंडी सचिव ने कहा- अध्यादेश के बाद किसान हमारी आंखों के सामने अपनी उपज मंडी परिसर के बाहर तिरपाल लगाकर बैठे व्यापारियों को बेचते हैं, लेकिन हम उन्हें रोक नहीं पाते। यह पॉवर हमारे पास नहीं है। व्यापारी का टैक्स बच रहा है तो वह मंडी आकर उपज नहीं खरीद रहा। मंडी से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में यहां 49 लाइसेंसी व्यापारी हैं, लेकिन यह भी उपज बाहर खरीद रहे हैं।

वायरस ने बिगाड़ा मिजाज, बिगड़ी क्वालिटी
किसान रमेश यादव, संतोष यादव, रूपेश पाटीदार आदि ने बताया इस बार भी मिर्च वायरस अटैक रहा। इसके चलते क्वालिटी बिगड़ गई। लेकिन भाव अपेक्षाकृत ठीक रहे। ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ा।

बेडिय़ा मंडी में मिर्च का कारोबार
वर्ष आवक न्यूनतम भाव अधिकतम भाव
2015-16 105717 3050 16000
2016-17 221833 3500 18000
2017-18 95876 3000 11000
2018-19 164205 3000 13200
2019-20 310378 3500 17000
2020-21 2301 5000 13500
(जानकारी बेडिय़ा मंडी से मिले आंकड़ों के अनुसार)

मंडी का राजस्व इस साल जबर्दस्त पिछड़ गया है। ऐसे ही हालात रहे तो कर्मचारियों का वेतन निकालना मुश्किल होगा। यहां की वस्तुस्थिति से लगाकार हाईकमान को अवगत करा रहे हैं। मरदलिया मंडी परिसर को शुरू करने की मांग भी की जा रही है।
बलीराम बिर्ला, प्रभारी मंडी सचिव, बेडिय़ा