
बिजली उत्पादन के लिए नगर के समीप नर्मदा पर बना डेम।
चैतन्य पटवारी, मंडलेश्वर.
नर्मदा पर 400 मेगावाट बिजली उत्पादन करने के उद्देश्य को लेकर महेश्वर जल विद्युत परियोजना की नींव रखी गई थी। करीब २५ वर्ष बीतने के बाद भी परियोजना अपना साकार रूप नहीं ले पाई। यही कारण है कि यहां अभी तक बिजली उत्पादन शुरु नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की एनटीपीसी इकाई द्वारा बेडिय़ा के नजदीक सेल्दा में १३२० मेगावाट बिजली उत्पादन का पॉवर प्लांट तैयार किया जा रहा है। जिसका काम जोर-शोर से चल रह है। यहां केंद्र और राज्य सरकार की अनदेखी के चलते महेश्वर जल विद्युत परियोजना का काम लंबे समय से बंद पड़ा है। बांध तैयार होने के बाद भी बिजली उत्पादन अभी तक शुरु नहीं हुआ। करोड़ों रुपए की मशीनरी के साथ ही पूरा प्रोजेक्ट को लावारिस हाल पर छोड़ दिया है। इससे लोगों के मन में भी यह सवाल कौंध रहा है कि करोड़ों रुपए की यह परियोजना कभी शुरु होगी या नहीं। शासन-प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देने की जरुरत है।
४६५ से ८००० करोड़ हुई लागत
उल्लेखनीय है कि महेश्वर जलविद्युत परियोजना का काम नर्मदा वैली विकास प्राधिकरण के द्वारा शुरु किया गया था। शुरुआती दौर में इसकी लागत 465 करोड़ थी, जो बढ़कर 8000 करोड़ तक पहुंच चुकी है। कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस 8000 करोड़ पर प्रतिदिन 80 लाख का ब्याज लग रहा है।
सरकार धन की बड़ी बर्बादी
महेश्वर परियोजना का मकसद ही सिर्फ बिजली उत्पादन करना था। जिसके चलते अन्य बांधों की तरह यहां नहरें नहीं बनाई गई। प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपए दांव पर लगने के बाद भी उपयोग नहीं हो रहा है, जो सरकारी धन की बड़ी बर्बादी है। वहीं दूसरी ओर सेल्दा में करोड़ों रुपए की लगात से पॉवर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। जहां 1320 मेगावाट बिजली उत्पादन का दावा किया जा रहा है।
एक नजर में महेश्वर परियोजना
-४०० मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य।
-२५ वर्ष पूर्व शुरु हुआ था काम।
-५० मेगावाट के दो टरबाइन लगे।
-०६ टरबाइन लगना बाकी।
-४५० करोड़ रुपए प्रारंभिक लागत तय हुई थी शुरुआत में।
निमाड़ के लिए प्रोजेक्ट पूरा होना जरुरी
इनदिनों गर्मी के कारण नर्मदा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। जानकारों की मानें तो इसी तरह पानी कम होता रहा, तो नदी के सुखने का डर सता रहा है। बांध से बिजली उत्पादन करने के लिए डेम में पानी भरा जाना जरुरी है। इससे मंडलेश्वर सहित महेश्वर और बड़वाह तक पानी का लेवल नजर आए। जिससे नर्मदा का अस्तित्व भी बचा रहेगा।
मैं अभी दिल्ली में हूं। वापस आने के बाद उक्त विषय पर चर्चा करेंगे।
पीके घोसाल, परियोजना अधिकारी जल विद्युत परियोजना
Published on:
01 May 2018 12:37 pm
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