
महेश्वर बांध में लगा गेट नंबर 20 जो पूरी तरह नीचे झूक गया है।
हेमंत जाट. खरगोन
नर्मदा नदी पर बने महेश्वर बांध से बिजली उत्पादन की उम्मीदें धुंधली पड़ चुकी है। इसके उल्ट से बांध की असुरक्षा का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, बांध के 27 हाईड्रोलिक गेट पिछले करीब १७ वर्षों से हवा में लटके हुए हैं। इसमें से एक गेट (20 नंबर) भार नहीं संभाल पाने के कारण गिरने के साथ नदी तल पर जा टिका है। इससे इस गेट से पानी का प्रवाह भी रूक गया है। हालांकि खरगोन कलेक्टर गोपालचंद्र डाड का कहना है कि एक गेट के नीचे आने से फर्क नहीं पड़ता। बांध में अभी ऐसे 26 गेट ओर हैं, जो टनों वजनी होकर लंबे समय से हवा में लटक रहे हैं। इनके झुकने अथवा नीचे आने पर बांध में स्वत: ही पानी भरना शुरू हो सकता है। ऐसे में मंडलेश्वर से जुड़ी कॉलोनियों सहित आसपास के लगभग 23 गांवों में बड़ी तबाही हो सकती है। क्योंकि इन गांवोंं का अभी तक पूरी तरह पुनर्वास नहीं हुआ। बड़ी आबादी आज भी मूल गांवों में रहती है। उधर, गेट के नीचे झुकने के बाद भी अभी तक न तो प्रबंधन गंभीर नजर आ रहा और ना ही प्रशासन ने इसकी सुध ली है। शासन द्वारा बनाई गई डेम सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट में भी बांध के नियमित मेटनेंस पर जोर दिया है।
वर्षो ने नहीं हुआ मेंटनेंस
सूत्रों के अनुसार पिछले कई वर्षों से बांध के गेट्स का सालाना मेंटनेंस नहीं हुआ है । प्रबंधन का दावा है कि आखिरी बार 2016 में हुआ मेंटनेंस किया गया था। मानसून जारी है ऐसे में अन्य गेट्स भी यदि गिरे तो जलभराव हो सकता है और विस्थापित बिना शिफ्ट हुए जलमग्न हो सकते हैं । इससे भयंकर जान माल की हानि से इंकार नहीं किया जा सकता है ।
पूर्व कलेक्टर ने भी किया था आगाह
वर्ष 2016 में तत्कालीन जिला कलेक्टर नीरज दुबे ने भी प्रमुख सचिव को भेजे अपने प्रतिवेदन में हवा में लटके टनों वजनी गेट के संचारण व संधारण न होने से दुर्घटना का अंदेशा जताया था। जिसके बाद से प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पहल नहीं हुई।
23 गांवों के लिए खतरा
महेश्वर बांध के बैकवाटर की जद में एक दर्जन से अधिक गांव आते हैं। जिनके सामने भविष्य के हिसाब से बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों में जूलद, लेपा, बेहगांव, सुलगांव, पथराड़ सहित २३ गांव बांध से प्रभावित हैं।
एक नजर महेश्वर परियोजना
-1993 में शुरु हुआ था निर्माण।
-400 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
-10 टरबाइन लगी है
-400 करोड़ शुरुआती लागत
-2000 करोड़ अब तक खर्च
सूचना दी है
गेट का लंबे समय से हवा में लटके रहना भी इस दुर्घटना का एक कारण है । ये गेट बंद रहने के लिए डिजाइन किए गए है । आखिरी बार इन गेटों का जून 2016 में मेंटनेंस हुआ था तब से अभी तक मेंटनेंस नहीं हो सका है । डेम सेफ्टी कमेटी के अधिकारियों को सूचना भी दे दी गई है।
प्रणब कुमार घोषाल, जनरल मैनेजर हेड ऑफ द प्रोजेक्ट
सख्त एक्शन लेेंगे
नागरिकों की सुरक्षा के लिए बांध निर्माणकर्ता कंपनी के हेडऑफिस दिल्ली और राज्य शासन को पत्र लिखा गया है। गेट बंद होने की स्थिति में कोई भी जनहानि होती है, तो कंपनी के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
गोपालचंद्र डाड, कलेक्टर खरगोन
Published on:
08 Jul 2019 11:50 am
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