
MPs Cleanest and Best Government School
अश्विन गोस्वामी. खरगोन
विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को सफाई का संदेश देने के लिए सरकार ने स्वच्छ विद्यालय अभियान की शुरुआत की। खरगोन जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर बलवाड़ी का हाईस्कूल इन अभियान के रोल मॉडल के रूप में उभरा हैं। सरकार ने इसे प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ विद्यालय घोषित किया। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में विद्यालय को कलेक्टर अशोक कुमार वर्मा द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। स्कूल प्राचार्य अजय कुमार नारमदेव ने बताया कि करीब सालभर पहले स्वच्छ विद्यालय की स्पर्धा के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन डिटेल्स अपलोड की। इसके बाद स्टेट लेवल की टीम ने निरीक्षण किया। स्कूल में पेयजल, हाथ धुलाई, शौचालय, स्वच्छता और बच्चों के व्यवहार में बदलाव और बिल्डिंग केपिसिटी के बिंदुओं पर जांच की। इसमें स्कूल ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर 93 प्रतिशत अंक हासिल कर स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार 2016 का खिताब जीता। नारमदेव ने बताया कि पुरस्कार के लिए मंत्रालय से फोटोग्राफ्स मंगाए थे, जो भेज दिए गए हैं। करीब डेढ़ माह पहले मुंबई से विशेषज्ञों की टीम निरीक्षण के लिए आई। दल ने स्कूल को शत-प्रतिशत स्वच्छ बनाने के लिए कुछ बदलाव के निर्देंश दिए थे। जिनका पालन कर रिपोर्ट भेजी हैं। एक सिंतबर को मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा देशभर से चुनी 70 स्वच्छ विद्यालयों को दो लाख रूपए का पुरस्कार दिया जाएगा। इसमें बलवाड़ी स्कूल का नाम भी शामिल हैं। खरगोन जिले के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
इन बिंदुओं की जांच में मिले इतने अंक
वाटर - 100 प्रतिशत
स्कूल में ट्यूबवेल का पानी उपयोग में लाया जाता हैं। इसे आरओ मशीन से साफ कर बच्चों के पीने के लिए साफ-सुथरी टंकी में रखा जाता हैं। पानी की टंकी हर माह के अंतिम सप्ताह में टंकी की सफाई होती हैं। इस पर अगले माह सफाई की तारीख भी लिखी जाती हैं।
टॉयलेट -82.14 प्रतिशत
यहां लड़कों के लिए 6 और बालिकाओं के लिए 4 टॉयलेट बने हैं। इनमें पर्याप्त पानी की व्यवस्था की गई हैं। सुविधाघरों की नियमित साफ-सफाई होती हैं। टॉयलेट की सफाई की जिम्मेदारी शिक्षक खुद मॉनीटरिंग करते हैं। सुविधाघर को साफ-सुथरा रखने के लिए स्लोगन भी लिखे हैं।
हैंडवाशिंग विथ सोप - 90 प्रतिशत
सुविधाघर के बाहर कॉमन हैंडवॉश स्टेंड बनाया हुआ हैं। यहां लिक्विड हैंडवॉश के साथ ही साबुन भी रखे हुए हैं। शिक्षकों ने बच्चों को हाथ धुलाई के लिए इतना जागरूक कर रखा हैं, कि बच्चें खुद ही टॉयलेट से निकल या खाना खाने के पहले हाथ धोने पहुंच जाते हैं।
ऑपरेशन एंड मेंटनेंस - 100 प्रतिशत
स्कूल परिसर में कहीं भी कागज का टुकड़ा बिखरा नहीं देखा जा सकता। हर कक्षा और गलियारे में डस्टबिन रखे गए हैं। कचरे का नियमित निपटान किया जाता हैं। परिसर के आसपास भी साफ-सुथरा वातावरण रहता हैं। यहां पृथक से कचरा पेटी दहन भट्टी भी बना रखी हैं।
बिहेवियर चेंज एंड केपिसिटी बिल्डिंग -100 प्रतिशत
बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल भवन में हर तरह के संसाधन मौजूद हैं। यहां सुव्यवस्थित लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लेब सहित स्टॉफ रूम, व्यवस्थित फर्नीचर और ब्लेक बोर्ड लगे हुए हैं। स्वच्छ वातावरण का असर स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों के व्यवहार में भी देखा जा सकता हैं।
ऐसा हैं प्रदेश का सबसे साफ-सुथरा विद्यालय
सनावद रोड पर बसे गांव बलवाड़ी की मुख्य सड़क से करीब आधा किमी दूर यह हाईस्कूल बना हुआ हैं। उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने के बाद यह स्कूल अन्य सामान्य सरकारी स्कूल से कुछ अलग नजर आता हैं। परिसर में राष्ट्रध्वज तिरंगा लहराता दिखाई पड़ता हैं। परिसर में हरे-भरे पौधे और आकर्षक गमले सजे हुए हैं। बरामदे में एक टेबल पर बच्चों के पढऩे के लिए किताबे रखी मिली, तो साफ-सुथरी कक्षा में यूनिफार्म पहने बच्चे पढ़ाई में जुटे थे। बरामदे और कक्षाओं में डस्टबिन रखे थे। वहीं बच्चों के पीने के लिए स्टील की एक साफ टंकी और कुछ गिलास रखे हुए थे। पानी की टंकी पर कुछ तारीखे लिखी थी, जिसका कनेक्शन आरओ मशीन तक किया गया था। स्कूल की दीवारों पर स्वच्छता, पढ़ाई और बेटी बचाओ के स्लोगन लिखे दिखे। लंच ब्रेक की छुट्टी में बच्चे मैदान की तरफ निकले तो शिक्षकों से फुटबॉल और बेट-बॉल लेकर खेलने लगे।
बेहतर बनाने का प्रयास
एक स्कूल ही अच्छे जीवन की नींव होती हैं। यहां साफ-सुथरा माहौल मिले, तो बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं। हम स्कूल को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चों और शिक्षकों के सहयोग से यह संभव हो पाया।
- कमल मंडलोई, डीपीसी, जिला शिक्षा केंद्र
सराहनीय पहल
यह एक सराहनीय पहल है। बच्चों व स्टाफ की मेहनत ने स्कूल को उपलब्धी दिलाई है। इससे अन्य स्कूलों को भी प्रेरणा मिलेगी।
- अशोक कुमार वर्मा, कलेक्टर
Published on:
13 Aug 2017 02:36 pm
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