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पहलाज निहलानी को हटाया, प्रसून जोशी सेंसर बोर्ड के नए अध्यक्ष

सूचना व प्रसारण मंत्रालय पहलाज निहलानी के कामकाज से खुश नहीं था। फिल्मों में कट्स और विवादित टिप्पणियों के कारण वे कई बार से विवादों में थे।

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नई दिल्ली: विवादों में रहने वाले पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) प्रमुख के पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह गीतकार प्रसून जोशी को अध्यक्ष पद पर काबिज किया गया है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय पहलाज निहलानी के कामकाज से खुश नहीं था। फिल्मों में कट्स और विवादित टिप्पणियों के कारण वे कई बार से विवादों में थे। उनके खिलाफ केरल हाईकोर्ट में अवमानना नोटिस का मामला भी चल रहा था जिसने आग में घी का काम किया। केरल हाइकोर्ट ने पहलाज से फिल्म 'का बॉडीस्केप्स को लेकर फैसला लेने को कहा था लेकिन एक साल में सेंसर बोर्ड के सदस्यों के चार बार फिल्म देखने के बाद भी कोई फैसला नहीं आया।

तीन साल रहा पहलाज का कार्यकाल
पहलाज का कार्यकाल महज तीन साल रहा। ये तीन साल काफी विवादों में भी रहे। पहलाज के फैसलों की काफी आलोचना की गई थी। इसके साथ ही अभिनेत्री विद्या बालन को भी बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।

उत्तराखंड के मूल निवासी हैं प्रसून जोशी

प्रसून जोशी का जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के दन्या गाँव में 16 सितम्बर 1968 को हुआ है। उनके पिता का नाम देवेन्द्र कुमार जोशी और माता का नाम सुषमा जोशी है। उनका बचपन एवं उनकी प्रारम्भिक शिक्षा टिहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नरेन्द्रनगर में हुई, जहां उन्होने एम.एससी. और उसके बाद एम.बी.ए. की पढ़ाई की। प्रसून जोशी हिन्दी कवि, लेखक, पटकथा लेखक और भारतीय सिनेमा के गीतकार हैं। वे विज्ञापन जगत की गतिविधियों से भी जुड़े हैं और अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी 'मैकऐन इरिक्सन' में कार्यकारी अध्यक्ष हैं। फ़िल्म तारे ज़मीन पर के गाने 'मां.. 'के लिए उन्हें 'राष्ट्रीय पुरस्कार' भी मिल चुका है।

अभिनेता कबीर बेदी ने बताया था पहलाज को त्रासदी
अभिनेता कबीर बेदी ने सेंसर बोर्ड के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए गुरुवार को कहा कि बोर्ड भारत की छवि खराब कर रहा है और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी को त्रासदी की संज्ञा दी। कबीर ने ट्विटर पर एक अन्य ट्विटर उपयोगकर्ता द्वारा शेयर किए गए अमर्त्य सेन पर बने वृत्तचित्र को सेंसर बोर्ड की मंजूरी न दिए जाने को लेकर सवाल उठाए थे। कबीर बेदी ने इस लिंक को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को भी टैग किया था और लिखा था कि सेंसर बोर्ड को समझ नहीं आ रहा कि वह अपनी मूर्खतापूर्ण मांगों के चलते भारत की छवि को कितना नुकसान पहुंचा रहा है। पहलाज निहलानी एक त्रासदी हैं।

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