
Nimari ChilliNimari Chilli
खरगोन। निमाड़ की लाल सुर्ख मिर्च का तीखापन अब यूरोपीय देशों में ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर का हिस्सा बन रही है। एक जिला एक उत्पाद में शामिल खरगोन जिले की लाल मिर्च विदेश तक पहुंच चुकी है। आमतौर पर मिर्च की फसल जोखिम वाली मानी जाती है। अन्य फसलों की तुलना में महंगा बीज, खाद, दवाई और मजदूरी पर खर्च होता है। ऐसे में ज्यादातर किसान इस फसल को लगाने से बचते हैं। इसके उलट खरगोन जिले में किसानों ने मिर्च उत्पादन में नए आयाम स्थापित किए हैं। इससे न केवल प्रसिद्धि मिली, बल्कि बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन भी हुआ है।
1. तकनीक को समझा
किसानों के अनुसार, मिर्च नकदी फसल है। 45 दिन बाद पैदावार शुरू होने के साथ ही आमदनी होने लगती है। घर पर दादा-पिता और गांव के कई किसानों को बचपन से मिर्च की खेती करते देखा। यह सभी परपंरागत खेती करते थे इसलिए खास फायदा नहीं मिल पाया। गांव के आठ किसानों ने समूह से जुड़कर तीन वर्ष तक अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेकर तकनीक सीखी। इसमें सफलता मिली और फिर खेती में मुनाफा होने लगा।
2. अपना माल-अपना ब्रांड
खरगोन तहसील में ही मोठापुर गांव के किसानों ने निमाड़ी लाल तड़का मिर्च का ब्रांड बनाया है। उन्नतशील किसान दिनेश पाटीदार बताते हैं कि हम अच्छे से अच्छा भोजन खाएं इस सोच को लेकर 45 किसान जैविक और आइपीएम (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट) तकनीक से मिर्च पैदा कर रहे हैं। औसतन प्रति किसान 20 क्विंटल तक मिर्च की पैदावार हो रही है। यह पूरा माल देश के अलग-अलग राज्यों में बेचा जाता है। 2012 में चीन में भी मिर्च भेजी गई थी।
Published on:
22 Apr 2023 02:06 pm
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