
यहां मिला दुर्लभ सफेद सांप, विलुप्त होने की कगार पर है ये प्रजाति
खरगोन. सामान्य तौर पर सांप को देखकर जहां लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वहीं, लूद में राम मंदिर प्रांगण में करैत प्रजाति (सफेद ) दुर्लभ सांप देखा गया। सांप जलूद में राम मंदिर प्रांगण में निकला था। जिसे स्थानीय रहवासी पंकज सिंह सोलंकी ने देखकर वन्य प्राणी संरक्षक संस्था थैंक्यू यू नेचर वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों को सूचना दी। रात करीब साढ़े 9 बजे टीम यहां पहुंची और सांप को पकड़कर वन विभाग को सौंपा।
संस्था अध्यक्ष महादेव पटेल ने बताया कि, सफेद सांप करैत प्रजाति के होते हैं, जो बहुत मुश्किल से दिखाई देते हैं। मंडलेश्वर क्षेत्र में इसके पहले 29 जून 2020 में सफेद सांप मिला था, जिसका रेस्क्यू थैंक्यू नेचर वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने किया था। वहीं, देश में सफेद सांप पहली बार भुवनेश्वर में देखा गया था। संस्था के सदस्य अरुण केवट ने बताया कि, आमतौर पर कॉमन करैत प्रजाति के सांप काले रंग के होते हैं। फिलहाल, रेस्क्यू किये गए सांप की लंबाई करीब 18 इंच हैं।
पूरा रंग सफेद, सांप की विशेष प्रजाति
एसडीओ फॉरेस्ट एमएस मौर्य के अनुसार, करैत सांप की प्रजाति विशेष श्रेणी या विलुप्त प्रजाति में नहीं है। ये भारत के निमाड़ क्षेत्र में आसानी से मिलने वाला सांप है। लेकिन, इसका पूरा रंग सफेद होना दुर्लभ है। मौर्य ने कहा कि, किसी भी प्राणी का सफेद होना एल्बिनो कहलाता है। इसे एक्रोमिया, एक्रोमेसिया या एक्रोमेटोसिस (वर्णांधता या अवर्णता) भी कहा जाता है। गर्भ में शिशु के शरीर में मेलेनिन के उत्पादन में शामिल एंजाइम के अभाव की वजह से त्वचा, बाल और आंखों में रंजक या रंग के संपूर्ण या आंशिक अभाव द्वारा चिह्नित किया जाने वाला एक जन्मजात विकार है। ये विकार किसी भी जीव में पाया जा सकता है।
वन विभाग की अभिरक्षा में स्वस्थ अवस्था में है सांप
इस संबंध में मंडलेश्वर के फॉरेस्ट एसडीओ एम.एस. मौर्य ने बताया कि, सफेद रंग का करैत प्रजाति का सांप मिलने की सूचना मिली। इससे पहले भी इसी प्रजाति का सफेद सांप मंडलेश्वर रेंज में मिला था। फिलहाल, में ये सांप वन विभाग की अभिरक्षा में स्वस्थ अवस्था में है। उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
12 Oct 2022 04:46 pm
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