
भीकनगांव में एक अनोखा मंदिर है— सेवरी धाम मंदिर
एमपी के भीकनगांव में एक अनोखा मंदिर है— सेवरी धाम मंदिर। खेतों के बीच बने सेवरीधाम में इन दिनों हजारों लोग आ रहे हैं। भीकनगांव से करीब नौ किमी व सनावद से 33 किमी दूर स्थित मंदिर में 15 सितंबर को वार्षिक विशेष पूजन का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर यहां डेढ़ क्विंटल शुद्ध घी से बना प्रसाद वितरित किया जाएगा। यह मंदिर हजारों घंटियों के लिए भी जाना जाता है।
मंदिर का शिखर भी अनूठा है। 61 फीट ऊंचे इस शिखर में से होकर फीपर के पेड़ की अनेक शाखाएं निकलती है। खास बात यह है कि शिखर के निर्माण से लेकर पूर्णता तक पेड़ की एक भी टहनी को नहीं काटा गया। पेड़ के मूल में मोती बाबा की पाषाण प्रतिमा है। मान्यता है कि फीपर के पेड़ की सात बार परिक्रमा श्रद्धापूर्वक करने पर स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
विशेष पूजा के पहले मंदिर समिति की ओर से 14 सितंबर को भंडारा और इसके लिए कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कांझर के प्रदीप सिंह चौहान, शंभू सिंह राठौर बताते हैं कि अमावस्या को अल सुबह यहां हजारों लोग आते हैं और यहां के झीरे का पानी केन या बर्तन में भरकर साथ ले जाते हैं। यह जल भरा पात्र कितनी ही दूर क्यों न ले जाना हो, जमीन पर नहीं रखा जाता। इसे संभाल कर पूजा घर में या खूटी पर टांगते हैं तथा इस जल का छिड़काव फसलों पर करते हैं।
घंटियों से सिंहासन का निर्माण
इस मंदिर की खासियत पीतल की हजारों घंटियां हैं। परिसर में लगभग 10 हजार छोटी बड़ी घंटी हैं, जोकि 100 ग्राम से लेकर 52 किलो तक की हैं। लोकेन्द्र राठौर व जितेन्द्र सिंह झाला बताते हैं कि मंदिर में चढ़ाई घंटियों से बाबा का सिंहासन का निर्माण किया गया है।
सत्येंद्र चौहान व त्रिलोक सूर्यवंशी बताते हैं कि यहां पर मन्नत पूरी होने पर भक्त पीतल की घंटी चढ़ाते हैं। मंदिर में 15 सितंबर को होनेवाली विशेष पूजा में श्रद्धालु मन्नत उतारेंगे। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां घंटियां चढ़ाते हैं। एक ओर जहां किसानों के खेतों से मोटर पंप चोरी की आए दिन शिकायतें आती रहती है वहीं सुनसान जगह पर होने के बावजूद सेवरीधाम देवस्थान मंदिर से अब तक एक भी पीतल की घंटी चोरी नहीं हुई।
Published on:
13 Sept 2023 03:06 pm

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