
खरगोन/खंडवा। बाघ के हमले में घायल युवक की मौत के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। बाघ को पकड़ने के लिए बुलाई गई टीम गांवों उसके पीछे—पीछे दौड़ रही है, लेकिन पकड़ने की अनुमति मिलने से रेस्क्यू आपरेशन शुरू नहीं हो पाया है। गांवों में बाघ से ज्यादा उसकी दहशत दौड़ रही है।
चिरिया वन रेंज के आभापुरी, मिठावल, गवला और भावसिंग पुरा सहित दस गांवों के लोगों में बाघ के आने से दहशत का माहौल है। पिछले तीन दिनों से लोग पूरी रात ठीक से सो नहीं पा रहे हें। हर किसी के मन में जंगली जानवर के आक्रामण का खौफ है। शुक्रवार बाघ ने भावसिंगपुरा में एक बछड़े का शिकार किया। वन अधिकारियों ने बताया कि दो दिन से बाघ का मूवमेंट अंबाडोचर, गवला और भावसिंगपुरा के आसपास है। क्षेत्र के ग्रामीणों को अलर्ट किया गया है। बाघ की मूवमेंट दक्षिण की तरफ है। रेस्क्यू टीम उस पर नजर बनाए हुए है।
दहशत: दहाड़ सुनकर कांप गए, मुंह से नहीं निकली अवाज
शुक्रवार सुबह 3 बजे बाघ भावसिंगपुरा में फूलसिंह पिता ठाकुर भील के घर के आंगन तक चलाया आया था। उसने यहां रस्सी से बंधे बछड़े का शिकार किया, शिकार के बाद घर में ही बैठ कर उसका सफाया किया। फूलचंद की पत्नी ने बताया कि वह सुबह 6 बजे तक हमारे आंगन में मौजूद था। हम लोग डर गए। तीन घंटे तक किसी के मुंह से आवाज भी नहीं निकली। उसकी दहाड़ सुनकर हम कांप गए थे। जान बचाने के लिए घर के अंदर बैठे रहे। सुबह सूरज निकलने पर खिड़की से झांककर देखा तो बाघ जा रहा था।
पीड़ा: मृतक के घर नहीं पहुंचा कोई अधिकारी, 10 हजार की मदद
बाघ के हमले से मृतक किसान संतोष को अभी वन विभाग से तात्कालिक सहायता के रूप में दस हजार रुपए दिए गए। यह राशि सरपंच और जनपद प्रतिनिधि के हाथों दी गई। मृतक के परिवार में पत्नी सहित बहन, दो बच्चे और माता-पिता है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी संतोष के ऊपर थी। शुक्रवार तक वन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मृतक के घर नहीं पहुंचा। चिरिया रेंजर संजय चौहान का कहना है कि मृतक के परिवार को नियमानुसार 8 लाख की राशि दी जाएगी। यह रकम एक सप्ताह में मिल जाएगी।
खतरा: खेतों से अब आबादी की तरफ रूख
ग्रामीणों ने बताया कि दो दिन से बाघ खेतों व जंगल में घूम रहा था, लेकिन अब उसका रूख आबादी इलाकों की तरफ बढऩे लगा है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है। पंधाना वनमंत्री विजयशाह का गृह इलाका है। जहां से पांच किमी दूर भावसिंगपुरा में टाइगर ने बछड़े का शिकार किया है।
लाचारी: रेस्क्यू की अनुमति नहीं, पिंजरा लेकर पीछे घूम रहा वन अमला
बाघ को पकडऩे की अनुमति नहीं होने से फॉरेस्ट विभाग सहित रालामंडल इंदौर से आई रेस्क्यू टीम भी कुछ नहीं कर पा रही है। टीम पिंजरा लेकर पीछे-पीछे घुम रही है। खरगोन डीएफओ प्रशांत सिंह ने बताया कि बाघ के रेस्क्यू के लिए भोपाल चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति लेना होती है। अभी अनुमति नहीं है। बाघ के मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। अच्छी बात यह है वह जंगल की तरफ मूव कर रहा है।
खतरा नहीं
फॉरेस्ट की दो टीमें क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर बाघ के मूवमेंट पर नजर रख रही है। फिलहाल वह वापस जंगल की तरफ जा रहा है। एक-दो दिन देखेंगे। यदि खतरा लगा तो रेक्स्यू करेंगे।
Updated on:
11 Mar 2023 01:12 pm
Published on:
11 Mar 2023 12:27 pm
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