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भाई का शव देखते ही त्याग दिए प्राण, सदमा सहन नहीं कर पाया छोटा भाई

भाई का रिश्ता होता ही कुछ ऐसा है। विशेषकर बड़े भाई के प्रति मन में गजब की आत्मीयता रहती है। ऐसी कई बातें हैं जो मां पिता को नहीं बता सकते लेकिन लोग भाई को बेखौफ बता देते हैं। हालांकि वर्तमान में कई लोग रिश्ते नाते भूल रहे हैं लेकिन एक ऐसा मामले सामने आया जिससे ये साबित हो गया कि भाइयों का स्नेह और प्रेम मरते दम तक बरकरार रहता है।

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कसरावद के डाबरी में बड़े भाई की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाया छोटा भाई

खरगोन/कसरावद. भाई का रिश्ता होता ही कुछ ऐसा है। विशेषकर बड़े भाई के प्रति मन में गजब की आत्मीयता रहती है। ऐसी कई बातें हैं जो मां पिता को नहीं बता सकते लेकिन लोग भाई को बेखौफ बता देते हैं। हालांकि वर्तमान में कई लोग रिश्ते नाते भूल रहे हैं लेकिन एक ऐसा मामले सामने आया जिससे ये साबित हो गया कि भाइयों का स्नेह और प्रेम मरते दम तक बरकरार रहता है।

वर्तमान समय में जब लोग स्वार्थ में जीने लगे हैं तब भी कुछ बिरले लोग ऐसे भी हैं जो अपनों के लिए मन में प्रेम का भाव रखते हैं। ऐसा ही एक मामला कसरावद के डाबरी में देखने को मिला। यहां एक व्यक्ति को अपने बड़े भाई से ऐसा स्नेह था कि वह उनकी मौत का सदमा ही बर्दाश्त नहीं कर पाया। बड़े भाई का शव देखते ही उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।

जानकारी के अनुसार इंदौर में राधेश्याम मंडलोई का वृद्धावस्था और बीमारी के चलते देहांत हो गया। बड़े भाई का शव जैसे ही घर पहुंचा तो छोटे भाई शिवराम मंडलोई इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और बेेहोश होकर गिर गए। उन्हें रिश्तेदार धामनोद के अस्पताल ले गए लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक ही घर में दो भाइयों की मृत्यु से गांव में मातम , भाइयों के ऐसे स्नेह और प्रेम की प्रशंसा भी करते रहे लोग - दिवंगत शिवराम मंडलोई 63 साल के थे और सेवानिवृत्त शिक्षक थे। एक ही घर में दो भाइयों की मृत्यु से पूरे गांव में मातम छा गया। हालांकि लोग भाइयों के ऐसे स्नेह और प्रेम की प्रशंसा भी करते रहे।