खरगोन.
अप्रेल की तेज धूप। माथे से टपकता पसीना। धरती को चीरते हल और मेहनत। यह नजारे इन दिनों जिले में आम है। अवसर है खरीफ फसल बोवनी की तैयारी का। अक्षय तृतीया के अबुझ मुहूर्त में किसानों ने शनिवार को खेतों में जाकर पूजा की। आगामी बोवनी के लिए खेतों को तैयार करने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जिनके पास सिंचाई का पर्याप्त पानी है वह गर्मी का कपास भी लगाएंगे। अक्षय तृतीया पर किसानों ने हल चलाने का श्रीगणेश भी किया।
मांगलिक कार्यों की दृष्टि से अखातीज यानी अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है लेकिन अबकि बार इस अबूझ मुहूर्त में मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे। करीब दो दशक बाद इस तिथि में तारा अस्त होने के चलते ऐसे हालात बने हैं। शादी-विवाह, मुंडन, यज्ञोपवित संस्कार के लिए यह मुहूर्त जितना लाभदायी है वहीं इसे लेकर किसान वर्ग भी खासे उत्साहित रहते हैं। निमाड़ में इस दिन कई किसान गर्मी के सीजन की कपास बोवनी का श्रीगणेश कर चुके हैं। हालांकि अबकि बार गर्मी तेज होने से केवल वे किसान ही इस मुहूर्त बोवनी के लिए दिलचस्पी दिखा रहे हैं जिनके पास सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी है। वैसे आगामी खरीफ फसल को लेकर कृषि विभाग ने भी लक्ष्य निर्धारित किया है। बीते वर्ष की तुलना अबकि बार कपास के रकबे में आंशिक बढ़ोत्तरी हो सकती है।
खेती-किसानी : अक्षय तृतीया पर होती है कपास की मुहूर्त बोवनी
बामखल के किसान प्रवीण यादव ने बताया अबकि बार गेहंू, चने की उपज देरी से कटी है। अभी तापमान भी तेज है। पानी की कमी को देखते हुए इस बार अक्षय तृतीया पर कपास का मुहूर्त नहीं होगा। नर्मदा बेल्ट में जरूर कुछ किसान इस दिन बीजारोपण करेंगे।
कृषि विभाग ने तय किया लक्ष्य
उप संचालक कृषि एमएल चौहान ने बताया खरीफ सीजन का प्रस्तावित लक्ष्य रकबा तैयार किया है। इसके मुताबिक जिले में कपास 2.7 लाख हेक्टेयर में बोया जाएगा। बीते वर्ष यह रकबा 2.5 लाख हेक्टेयर था। उल्लेखनीय है कि जिले में लगभग 80 प्रतिशत किसान गर्मी सीजन का कपास लगात हैं। अधिकांश बोवनी मई के अंतिम व जून के प्रथम सप्ताह में होती है।
कृषि विभाग ने ऐसे तय किया रकबा