बच्चों का वजन उसके जन्म के आधार पर भी तय होता है। जन्म से 10 साल तक के बच्चे का वजन उसके जन्म के वजन के आधार पर निर्धारण करते हैं।
बच्चों में गलत खानपान और आउटडोर खेल गतिविधियां कम के कारण वजन तेजी से बढ़ रहा है। वजन का पैमाना बीएमआइ (बॉडी मास इंडेक्स) यानी शरीर का वजन और लंबाई का अनुपात होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों का वजन उसके जन्म के आधार पर भी तय होता है। जन्म से 10 साल तक के बच्चे का वजन उसके जन्म के वजन के आधार पर निर्धारण करते हैं।
आयु वजन
0-3 माह : प्रति सप्ताह 210 ग्रा. की बढ़त
5 माह : जन्म के वजन से दुगुना
6-12 माह : प्रति माह 400 ग्रा की बढ़त
1 वर्ष : जन्म के वजन से तीन गुना
2 वर्ष : जन्म के वजन से चार गुना
3 वर्ष : जन्म के वजन से पांच गुना
5 वर्ष : जन्म के वजन से छह गुना
7 वर्ष : जन्म के वजन से 7 गुना
10 वर्ष : जन्म के वजन से दस गुना
(यह चार्ट डब्लूएचओ के आंकडों के मुताबिक)
प्रतिवर्ष दो किलोग्राम वजन बढऩा जरूरी
एक औसत स्वस्थ बच्चे का वजन, उसकी &-7 वर्ष तक की आयु तक प्रति वर्ष दो किलोग्राम की दर से बढऩा चाहिए। उसके बाद वयस्क होने तक उसका वजन प्रति वर्ष तीन किलोग्राम की प्रतिवर्ष बढऩा चाहिए।
मोटापे के लिए आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार
आनुवांशिक कारणों से भी मोटापा बढ़ता है, हालांकि यह 3 से 5 प्रतिशत बच्चों में ही होता है। यदि माता-पिता मोटापे से ग्रस्त हैं तो बच्चे में भी मोटापे की आशंका बढ़ जाती है। किसी बीमारी के लंबे समय तक इलाज के दौरान एंटीबॉयटिक्स दवाएं वजन बढ़ा सकती हैं। 7-10 प्रतिशत बच्चों में इस वजह से मोटापा बढ़ता है।
80 प्रतिशत बच्चों में चॉकलेट, पिज्जा खाने का क्रेज
11 से 20 वर्ष की आयु के 80त्न बच्चे कैंडी, चॉकलेट, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, मीठी चीजें खाते हैं। इस आयु में बच्चों को वजन भी तेजी से बढ़ता है।
वजन बढऩे से ये दिक्कतें
फैटी लिवर, खरांटे, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप, पीसीओडी, त्वचा संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास में कमी, तनाव व डिप्रेशन की समस्या होती है।
- डॉ. राकेश मिश्रा, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल
- डॉ. विष्णु अग्रवाल शिशु रोग विशेषज्ञ, जेके लोन, शिशु चिकित्सालय, जयपुर