
समय का सदुपयोग
नियांश दाणी, उम्र- 7.5 साल
रामू को रेडियो पर गाने सुनने का बहुत शौक था। वह हर समय रेडियो के साथ ही रहता था, यहाँ तक कि पढ़ाई के समय भी वह रेडियो पर गाने सुनता रहता था।
एक दिन उसकी दीदी ने उसे पढ़ाई के साथ रेडियो पर गाने सुनते हुए देखा। तब उसकी दीदी ने रामू को प्यार से समझाया और कहां कि "तुम्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, न कि रेडियो सुनने में समय बर्बाद करना चाहिए। तुम्हारा भविष्य तुम्हारी पढ़ाई पर निर्भर करता है, हमेशा समय का सदुपयोग करना चाहिए।" रामू थोड़ा शर्मिंदा हुआ और रेडियो बंद कर दिया। उसने अपनी दीदी की बात मान ली और पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया। इस तरह उसकी दीदी ने रामू को सही रास्ते पर लाने में मदद की और उसका भविष्य उज्ज्वल बनाया।
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रेडियो बंद करना भूल गया था
अल्फिया, उम्र- 13 साल
आज परीक्षा का दिन था। आज रिया और रौनक की पहली परीक्षा थी। रिया और रौनक स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे। रौनक जल्दी से तैयार हो गया। उसने रेडियो अपने पास रखा और गाने सुनने लगा वह भी हेडफोन में लेट कर। रिया अपनी छोटी बनाते हुए रौनक के पास आई और बोली, “रौनक, आज तुम्हारी पहली परीक्षा है। तुम्हें एक बार फिर से सवालों के जवाब दोहरा लेने चाहिए, ताकि परीक्षा आसान हो जाए।” यह कहकर वह चली गई। रौनक ने उसकी बात नहीं सुनी। वह गाने सुनता रहा। जैसे ही रौनक ने अपनी बहन के कदमों की आवाज सुनी, उसने जल्दी से किताब उठा ली और पढ़ने का नाटक करने लगा। तभी रिया वापस आई और रौनक को डांटने लगी, क्योंकि वह रेडियो बंद करना भूल गया था।
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आलसी रोहन
दिया सोनी, उम्र-11 साल
एक दिन रोहन सवेरे सवेरे उठकर तैयार होकर वहां लेटे-लेटे गाने सुन रहा था और कॉमिक बुक पढ़ रहा था। वह प्रतिदिन ऐसे ही तैयार होकर लेटे-लेटे गाने सुनता और कॉमिक बुक पढ़ता। एक दिन रोहन की बहन मीना को यह अच्छा नहीं लगा वह रोहन के पास जाकर बोली यह तुम क्या कर रहे हो तुम आलस के मारे लेटे-लेटे रोज गाना सुनते हो और कॉमिक पढ़ते हो तुम्हारे दोस्त तुम्हें बाहर बुला रहे हैं। वह क्या सोचेंगे कि रोहन तो आलसी है। तुम्हें कुछ पढ़ लेना चाहिए। रोहन बोला अभी तो छुट्टियां चल रही है फिर मीना बोली ठीक है तो तुम्हें दादी के काम में हाथ बटाना चाहिए या बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलना चाहिए। रोहन बोला ठीक है मुझे मेरी गलती का एहसास हो गया है।
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रेडियो अडवेंचर
अराध्या गुप्ता, उम्र -11 साल
एक बार एक आरामदायक घर में राज और अनीता नाम के भाई - बहन रेहते थे। एक दिन धूप भरी दोपहर हो रही थी। वे दादाजी के पुराने रेडियो को सुन रहे थे, जो अद्भुत संगीत और कहानी बजाता था। अनीता उत्साह से बैठी थी। "सुनो राजू यह छिपे खजाने का गाना है। यह कहता है कि नक्शा बरगद के पेड़ के नीचे है।
उसने कल्पना भरी आंखों से कहा। राज तकिए पर आराम से लेटा हुआ था। अनीता यह सिर्फ एक कहानी है,वह हंसा। उसे किताब पढ़ते हुए रेडियो सुनना पसंद था। लेकिन अनिता दृढ़ थी। " नहीं मैं सच में सुना। यह एक असली नक्शा है। हमें देखने जाना होगा! " उसने जोर दिया। राज ने हां भरी, किताब बंद की और बैठ गया । कहानियां मनोरंम थी और बहन का उत्साह संक्रामक था। शायद कोई असली खजाना नहीं था , लेकिन अनीता के साथ एक साहसिक कार्य दोपहर बिताने का सबसे अच्छा तरीका था। साथ में उन्होंने रेडियो बंद किया और बाहर भाग गए , अपनी खुद की भव्य साहसिक यात्रा बनाने के लिए तैयार हो गए। जो उनकी छोटी संगीत मशीन से प्रेरित थी।
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आलस करना बुरी बला है
हिनु झाझडिया, उम्र - 9 साल
एक बार की बात है, एक गांव में मोहन नाम का एक लड़का रहता था। मोहन बहुत आलसी था। वह पूरे दिन बस खाना-पीना, नाचना और गाना ही करता रहता था। उसे पढ़ाई करना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी बहन उसे बहुत समझाती थी, पर वह उसकी बात नहीं मानता था। एक दिन अध्यापिका जी ने सभी बच्चों को घर पर करने के लिए एक काम दिया। घर आने के बाद मोहन ने सोचा कि पहले थोड़ी देर खेल लेता हूं। खेलते-खेलते शाम के छह बज गए। उसने कहा कि अभी तो बहुत समय है, थोड़ी देर बाद कर लूंगा। फिर वह खाना खाकर सो गया। अगले दिन जब वह स्कूल गया, तो उसके सभी दोस्त अपना काम करके लाए थे, लेकिन मोहन अपना काम करना भूल गया था। अध्यापिका जी ने सभी बच्चो की तारीफ़ कि पर उसे डांटा। तब मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अगले दिन अपना काम समय पर पूरा कर लिया।
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चीनू चौंक गया अरे!
जीनल, उम्र-10 साल
चीनू तकिए पर लेटा हुआ किताब पढ़ रहा था। पास में टेप रिकॉर्डर रखा था और उसमें से मीठा गाना बज रहा था। चीनू गाने के साथ-साथ पैर हिला रहा था। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। तभी उसकी दीदी जीनू कमरे में आई और बोली, चीनू, ऐसे लेटकर मत पढ़ो। ठीक से बैठकर पढ़ाई करो। चीनू हंसकर बोला, जीनू दीदी, मैं पढ़ भी रहा हूं और गाना भी सुन रहा हूं। जीनू ने शरारत से टेप रिकॉर्डर बंद कर दिया। चीनू चौंक गया अरे! गाना कहांं गया। जीनू बोली, पहले ठीक से बैठकर पढ़ो, फिर गाना चलेगा।चीनू ने तुरंत किताब ठीक से पकड़ ली और सीधा बैठ गया ठीक है दीदी। जीनू मुस्कराई और फिर से गाना चला दिया। अब चीनू ध्यान से पढ़ भी रहा था और खुश भी था।
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किताबों से दोस्ती
नीलम विश्वकर्मा, उम्र-12 साल
सुनीता सुबह देखती है कि उसका भाई रोहन टीवी में कार्टून देख रहा है। सुनीता उसे किताबें देती और कहती है समय बर्बाद मत करो किताबें या अखबार पढ़ो, इससे तुम्हें अधिक लाभ है एक दिन रोहन ने सोचा मैं आज किताबें पढ़ता हूं। इन किताबों से लाभ क्या है। वह किताब पढ़ने लगता है। किताबों की कहानी कविता आदि से उसका मन किताबों में लग गया। वह जब किताबों को पढ़ना बंद किया तब उसे एक नई खुशी मिली। जो उसे टीवी जैसे उपकरणों में नहीं मिली थी रोहन ने कहा किताबों से हमें ज्ञान और आनंद मिलता है।
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राहुल की सीख
कृति, उम्र-10 साल
राहुल पढ़ाई में अच्छा था। लेकिन वह लेटकर किताबें पढ़ता था साथ में रेडियो भी सुनता था। पढ़ते वक्त एक दिन उसकी बड़ी बहन पिंकी ने उसे कहा। हमेशा सीधे बैठ कर पढ़ाई करनी चाहिए और शांत जगह पर जहां आपका ध्यान सिर्फ पढ़ाई में होना चाहिए। राहुल ने फिर भी बात नहीं मानी और वह फिर से लेट कर पढ़ने लगा। एक दिन उसकी कमर दुखने लगी और अगले दिन ही उसकी परीक्षा थी। पिंकी ने राहुल की थोड़ी देर कमर दबाई। राहुल मेज पर बैठकर पढ़ाई करने लगा और साथ में रेडियो भी बंद कर दिया। उसे ऐसा पढ़ते देख उसकी बड़ी बहन पिंकी को बड़ी खुशी हुई। अगले दिन वह अपनी परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ पास हो गया। अब वो मन लगाकर पढ़ने लगा।
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नव्या की शिक्षा
भाविका सुथार, उम्र-10 साल
एक बार एक शहर में नव्या और उसका भाई रोहन रहते थे। रोहन हर रोज टाइम पास करता रहता था। कभी गाने सुनता और कभी कॉमिक लेकर बैठ जाता था।
एक बार उसकी बहन नव्या उससे बहुत परेशान हो गई। वह रोहन के पास गई और उससे बोली, “रोहन तुम हर रोज टाइम पास क्यों करते रहते हो? क्या तुम कभी पढ़ाई भी करते हो “नव्या ने अपने भाई रोहन को प्यार से समझाया। रोहन फिर इस प्रकार हर रोज पढ़ाई करने लगा। फिर परीक्षा में बहुत अच्छे नंबर आए और उसकी बहन नव्या उससे बहुत खुश हुई।
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मनोरंजन के साथ पढ़ाई
परिधि गर्ग, उम्र 10 वर्ष
वीरू नारंगी तकिए पर लेटकर, रेडियो चलाकर कहानी की किताब पढ़ रहा था। उसकी बहन वीरा पढ़ाई कर रही थी। उसे वीरू के रेडियो के शोर से परेशानी हो रही थी। वीरा ने परेशान होकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। वीरू चाहता था कि वीरा उसके साथ लेटकर मजेदार कहानियों का आनंद ले ताकि उसे पढ़ाई से थोड़े समय के लिए आराम मिल जाए। इसलिए उसने गाने की आवाज बढ़ा दी। परेशान वीरा गुस्से में कमरे से बाहर निकली और उंगली दिखाते हुए बोली - वीरू! मुझे पढ़ाई में परेशानी हो रही है, रेडियो की आवाज कम कर दो। वीरू ने कहा - तुम बहुत समय से पढ़ाई कर रही हो, क्यों ना हम थोड़े समय मजेदार कहानियां पढ़ें। वीरा ने भी सोचा क्यों ना थोड़ी देर आराम कर लिया जाए। फिर दोनों ने खुशी - खुशी कहानियां पढ़ी और थोड़े समय बाद वीरा वापस पढ़ाई करने लगी।
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टिंकू एक अच्छा बच्चा
यशी शर्मा, उम्र- 11 साल
टिंकू एक दिन स्कूल से आकर कपड़े उतार कर और खाना खाकर सो जाता है। फिर शाम को आराम से लेटकर किताब पढ़ रहा था और गाने सुन रहा था। थोड़ी देर बाद उसकी दीदी आई और बोली कि तुम कितनी देर से पढ़ाई कर रहे हो। चलो खेलते हैं। फिर टिंकू ने कहा कि मुझे नहीं खेलना। तो यह बात उसकी दीदी ने अपने मम्मी पापा को बताई। तो उसके मम्मी पापा बोले कि टिंकू एक बड़ा और अच्छा बच्चा हो गया है।
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बंटी की चालाकी
रूधव सिंह, उम्र- 12 साल
आज मीतू अकेले स्कूल से घर वापिस आ रही है। उसे बंटी की चिंता हो रही है। वे दोनों हर रोज़ ईकट्ठ़े स्कूल जाते हैं। मीतू बंटी से तीन साल बडी़ है। छोटे भाई होने के कारण बंटी बहुत शरारती है। मीतू को शक है कि बंटी बहाना करके स्कूल नहीं आया। आज सुबह वह मां से कह रहा था की उसे पेट में दर्द है। तो मां ने स्कूल जाने से मना किया और कहा की मां बंटी को डाॅक्टर के पास ले जाएगी। बंटी को जाकर कमरे में आराम करने को कहा। बंटी धीरे-धीरे मुस्करा रहा था, मीतू ने जाने से पहले देख लिया था। तो उसने सोचा स्कूल से आने के बाद मैं उसे पकडू़ंगी। मीतू का शक सही निकला, उसने दरवाज़े से ही गाने की आवाज़ सुनी। अन्दर आकर देखा तो बंटी बड़े मज़े से गाने सुन रहा था और काॅमिक्स पढ़ रहा था। मीतू ने उसे डांट लगाई और कहा, 'मैं अभी मां को बताती हूं'। बंटी ने माफ़ी मांगी और कहा, 'मैं फिर कभी झूठ नहीं बोलूंगा'। तो मीतू ने कहा, 'बंटी, तुमने झूठ बोल कर स्कूल से छुट्टी ली। इसकी सज़ा तो मां ही तुम्हे देंगी। अच्छा होगा की तुम स्वयं ही मां को बताओ और माफी मांगो'। बंटी ने झटपट जाकर मां से माफ़ी मांगी। यह देख कर मीतू खुश हो गयी और बंटी को गले से लगा लिया।
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अंकिता पढ़ने में बहुत होशियार थी
मनीष जांगिड़,उम्र -11 साल
आरव, अंकिता दो भाई- बहन थे। अंकिता पढ़ने में बहुत होशियार थी। आरव को गाने सुनने का बहुत शौक था। वह हमेशा गाने सुनता रहता था। अंकिता उसे पढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती थी। लेकिन वह उसकी एक भी बात नहीं सुनता था। एक दिन आंकिता ने उसका गाने सुनने का यंत्र कही छुपा दिया। आरव उसे ढूंढ़ने लगा। लेकिन उसे वह कही भी नहीं पाया। वह परेशान होकर अंकिता के पास गया। उसकी बहन ने कहा तुम मुझसे इसका दुरुपयोग न करने का वादा करो। आरव को उसकी बात समझ में आ गयी कि हमको अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए तथा अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
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बुरी आदत
रुतवी मीना, उम्र-10
रमेश को किताब पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। बह एक दिन रेडियो सुनते सुनते लेटकर किताब पढ़ रहा था। उसको लेटकर किताब पढ़ते हुए उसकी बहन ने देखा।उसकी बहन को अच्छा नही लगा। उसने रमेश को समझाया कि किताबे लेटकर नही पढ़नी चाहिए। लेकिन रमेश ने बहिन की बात को अनसुना कर दिया। तब बहिन ने मम्मी को रमेश के बारे में बताया। मम्मी ने रमेश को कहा किताबे हमेशा बैठ कर पढ़ी जाती है। तब से रमेश ने हमेशा के लिए लेटकर किताब पढ़ना छोड़ दिया। किताब पढ़ते समय रेडियो सुनना बंद कर दिया। बहन के समझाने और मां की डांट से रमेश की गलत आदत सुधर गई।
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मनोरंजन के साथ पढ़ाई
परिधि गर्ग, उम्र -10 साल
वीरू नारंगी तकिए पर लेटकर, रेडियो चलाकर कहानी की किताब पढ़ रहा था। उसकी बहन वीरा पढ़ाई कर रही थी। उसे वीरू के रेडियो के शोर से परेशानी हो रही थी। वीरा ने परेशान होकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। वीरू चाहता था कि वीरा उसके साथ लेटकर मजेदार कहानियों का आनंद ले ताकि उसे पढ़ाई से थोड़े समय के लिए आराम मिल जाए। इसलिए उसने गाने की आवाज बढ़ा दी। परेशान वीरा गुस्से में कमरे से बाहर निकली और उंगली दिखाते हुए बोली - वीरू मुझे पढ़ाई में परेशानी हो रही है, रेडियो की आवाज कम कर दो। वीरू ने कहा - तुम बहुत समय से पढ़ाई कर रही हो, क्यों ना हम थोड़े समय मजेदार कहानियां पढ़ें। वीरा ने भी सोचा क्यों ना थोड़ी देर आराम कर लिया जाए। फिर दोनों ने खुशी - खुशी कहानियां पढ़ी और थोड़े समय बाद वीरा वापस पढ़ाई करने लगी।
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फिर दोनों खुश हो गए
गौरांश निझावन, उम्र- 7 साल
एक दिन माया ने अपन छोटे भाई वेद को देखा कि वह दिन भर कान में ईयरफोन लगाकर गाने सुन रहा है। तो उसने छोटे भाई को डांटा कि यह अच्छी आदत नहीं है। एक दिन वेद का कान में दर्द हो रहा था तो माया दीदी ने कहा कि यह ईयरफोन को कान में लगाने से हुआ है। तो वेद रोने लगा और दीदी से माफी मांगने लगा कि वह कभी भी ऐसी गलती नहीं करेगा। फिर दोनों खुश हो गए।
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आयुष की बुरी आदत
हिमाद्रि कुंमार चौहान, उम्र- 11 साल
आयुष और उसकी बहन अनाया की छुट्टियां चल रही थी। आयुष पुरे दिन रेडिओ पर गानें सुनता व मोबाईल चलाता रहता था। उसकी इस जित से उसकी मां भी परेशान हो रही थी। एक दिन अनाया ने समझाया की मोबाईल चलाने की लत अच्छा नहीं है। मोबाईल से उसकी आंखों और पढाई पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है। उसके बाद से उसने मोबाईल देखना छोड़ दिया। अब रोज़ाना अपनी बहन के साथ कहानियों की पुस्तकें पढ़ता। इस तरह से उसकी बुरी आदत गायब हो गई उसने अपनी छुट्टियों का आंनद भी उठा लिया।
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दीदी की सीख
युनय दत्त, उम्र-11 साल
दो भाई बहन थे, संजय और उसकी बड़ी बहन रीमा। एक दिन संजय स्कूल से लौटा और उसे याद आया की कल उसे स्कूल में प्रार्थना-सभा में एक भाषण देना है।उसने बड़ी मेहनत से एक घंटा बैठकर भाषण तैयार किया। कुछ देर बाद वह भाषण को बिना देखे बोलने का प्रयास करने लगा। लेकिन साथ ही उसने पास ही बहुत तेज़ गाने भी चला दिए और भाषण तैयार करने लगा। तभी उसकी दीदी वहां आगई और उसे ये सब देखकर बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और उसने संजय को समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना और बाहर चला गया। अगले दिन उस गाने के कारण उसे उसका भाषण याद नहीं रहा। जब वह घर पहुंचा तो बहुत उदास हो गया और उसे पढ़ते समय गाना चलाने की अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ। उसकी दीदी रीमा ने उसे समझाया की हमेशा जो भी काम करें उसे मन लगाकर करना चाहिए।
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Published on:
05 Jan 2026 02:03 pm
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