
happy kids
आम तौर पर दुनियाभर के बच्चे खुश रहते हैं, लेकिन हर देश में उनकी खुशी का आधार
अलग-अलग होता है। जर्मनी के शहर फ्रेंकफर्ट की गेटे यूनिवर्सिटी ने हालिया सर्वे के
जरिए यह खुलासा किया है। 15 देशो में किए गए इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी ने
स्टूडेंट्स के खुश रहने और न रहने के आधार को जानना चाहा। इसके लिए उन्होंने 50
हजार स्टूडेंट्स को रिसर्च में शामिल किया।
रिसर्च में पाया गया कि
नॉर्दर्न यूरोपीयन कंट्रीज के स्टूडेंट्स अपने अपीरियंस और सेल्फ कॉन्फिडेंस के
चलते सैटिस्फाई नजर नहीं आते। 2013-14 में अल्जीरिया, कोलंबिया, इथोपिया, जर्मनी,
इजरायल, नेपाल, नॉर्वे, पोलैंड, रोमानिया, साउथ अफ्रीका, साउथ कोरिया, स्पेन, टर्की
और यूके में किए गए सर्वे में बच्चों के लाइफ सैटिस्फैक्शन पर ध्यान दिया गया।
इसमें उनकी ओवरऑल हैप्पीनेस में फैमिली, फ्रैंड्स, होमलाइफ, मनी-पजेशंस, स्कूल
लाइफ, लोकल एरिया और पर्सनल वैलबीइंग जैसे टूल्स की-फैक्टर के रूप में नजर
आए।
हैप्पीनेस में एज भी फैक्टर
सर्वे में पाया गया कि यूरोपीयन कंट्रीज
और साउथ कोरिया में बच्चों की हैप्पीनेस उनकी एज के हिसाब से बदलती जाती है। यहां
10 साल और 12 साल के बच्चे की खुशी का आधार अलग-अलग रहा, जबकि इजरायल और इथोपिया
सहित अन्य देश में ऎसा फैक्टर नहीं पाया गया।
कहां स्पैंड करते हैं टाइम
सर्वे में बच्चों की स्पैंडिंग टाइम पर भी फोकस किया गया था। इसमें सामने आया
कि एस्टोनिया और पोलैंड में बच्चे अपना ज्यादातर टाइम होम वर्क पूरा करने में
बिताते हैं। उधर, पोलैंड, इजरायल और नॉर्वे में बच्चे स्पोट्र्स प्लेइंग और
एक्सरसाइज में समय गुजारते हैं। अल्जीरिया, नेपाल, साउथ अफ्रीका के बच्चे भाई-बहनों
के साथ समय बिताकर खुश रहते हैं।
Published on:
18 May 2015 02:07 pm
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