भारतीय विमान पतन प्राधिकरण ने दी स्वीकृतिपरामर्श दाता की हुई नियुक्त, पहाडिय़ों की कटाई की करेगा डीपीआर तैयारजिला कलक्टर डीपीआर को सरकार को भेज कर मांगेेंगे बजट
मदनगंज-किशनगढ़.
किशनगढ़ एयरपोर्ट विस्तार में प्रमुख बाधा बनी टूंकड़ा की पहाडिय़ों का अब जल्द ही ड्रोन सर्वे होगा। भारतीय विमान पतन प्राधिकरण ने इन पहाडिय़ों के ड्रोन सर्वे की स्वीकृति दे दी है। ड्रोन सर्वे के बाद सम्पूर्ण खर्च की डीपीआर को जिला प्रशासन की ओर से राज्य सरकार को भेजा जाएगा। ताकि पहाडिय़ों की कटाई के लिए बजट मिल सके और कार्य शुरू किया जा सके। इस कार्य के लिए जिला कलक्टर ने एक निजी कम्पनी का परामर्श दाता भी नियुक्त कर दिया है।
किशनगढ़ एयरपोर्ट के साथ ही यहां के रन वे और टर्मीनल भवन के विस्तार का कार्य बीते दो तीन सालों से अटका हुआ है। उपरोक्त विस्तारिकरण कार्य के बाद ही इस एयरपोर्ट से एयरबस या बोइंग जैसे बड़े जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकेगी। लम्बे समय से एयरपोर्ट विस्तारीकण कार्य और बड़े जहाजों के लेंडिंग और टेक ऑफ में टूकड़ा की इन दो पहाडिय़ों की ऊंचाई और गेगल स्थित प्रसार भारती के टावर की ऊंचाई बड़ी बाधा के रूप में सामने आई। इसके बाद ही से ही राज्य सरकार के स्तर पर जिला प्रशासन और भारतीय विमान पतन प्राधिकरण के बीच इन पहाडिय़ों की ऊंचाई को काट कर कम करने की कवायद की जा रही है। साथ ही प्रसार भारती के टॉवर को अन्यत्र स्थानांतरित करने या इसकी भी ऊंचाई का कम करने के भी प्रयास किया जा रहा है। इसी कवायद में अब इन दोनों पहाडिय़ों की ऊंचाई को काटने के लिए भारतीय विमान पतन प्राधिकरण नई दिल्ली ने ड्रोन सर्वे के लिए अनुमति दे दी है और राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला कलक्टर ने भी खर्च की सम्पूर्ण डीपीआर तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वे के लिए एक निजी परामर्श कम्पनी के परामर्शदाता को नियुक्त भी कर दिया है। अब यह परामर्शदाता जल्द ही अपना ड्रोन सर्वे शुरू करेगा।
खर्च की डीपीआर होगी तैयार
परामर्शदाता ड्रोन सर्वे से टूंकड़ों की दोनों पहाडिय़ों की वर्तमान की ऊंचाई, इसके काटने के लिए जरुरी संसाधन, तकनीकी काम करने वालों समेत मलबा उठाने एवं सम्पूर्ण कार्य के खर्च की डीपीआर तैयार करेगा। यह डीपीआर सार्वजनिक निमा्रण विभाग को दी जाएगी और बाद में जिला कलक्टर के माध्यम से सरकार को भेज कर बजट मांगा जाएगा।
एयरपोर्ट विस्तार में बाधा
-रन वे : 2 किलोमीटर लम्बाई है और 45 मीटर चौड़ाई है, लम्बाई 1 किलोमीटर विस्तार होना है।
-टूंकड़ा की एक पहाड़ी 173 मीटर ऊंची है और इसमें से 23 मीटर कम करने की जरुरत है।
-टूंकड़ा की दूसरी पहाड़ी की ऊंचाई 168 मीटर है और इसमें से 18 मीटर कम की जानी है।
-आकाशवाणी के टॉवर की 200 मीटर ऊंचाई है और इसमें से 71 मीटर कम होने की जरुरत है। इस टॉवर की या तो ऊंचाई कम हो फिर यह अन्यत्र स्थानांतरित हो।
इनका कहना है...
टूंकड़ों की दोनों पहाडिय़ों के ड्रोन सर्वे की अनुमति मिल गई है, जल्द यह सर्वे शुरू होगा और इस सर्वे के आधार पर सम्पूर्ण खर्च की डीपीआर बना कर राज्य सरकार को भेजी जाएगी। बजट मिलने के बाद सरकार की ओर से काम शुरू होगा।
-बी.एल. मीणा, निदेशक, किशनगढ़ एयरपोर्ट।
> Kalicharan Kumar:
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