विश्व युवा दिवस पर विशेष: किशनगढ़ एसडीएम महज 27 साल की उम्र में संभाल रहे बड़ी जिम्मेदारी
तरुण कश्यप
मदनगंज-किशनगढ़। जिस बच्चे को एक स्कूल ने तीसरी कक्षा में एडमिशन देने से इसलिए मना कर दिया कि वह पढ़ाई में कमजोर था। उसी बच्चे ने मेहनत कर उसी स्कूल में अगले साल न केवल चौथी कक्षा में दाखिला लिया बल्कि वह दसवीं भी वहीं से टॉप करने निकला। स्कूल के दौरान पढ़ाई की ऐसी लगन लगी कि वह आज बहुत कम उम्र में देश की शीर्ष ब्यूरोक्रेसी (IAS)के अधिकारी बन चुके हैं। यहां बात कर रहे हंै किशनगढ़ के उपखंड अधिकारी (SDM)देवेंद्र कुमार यादव की।
सामान्य परिवार से निकले देवेंद्र कुमार का अपनी मेहनत और लगन के बलबूते महज 27 साल की उम्र में इस मुकाम पर पहुंचने तक का सफर कैसा रहा यह उन्होंने विश्व युवा दिवस पर राजस्थान पत्रिका के साथ साझा किया। उनका युवा दिवस पर युवाओं के लिए यह पैगाम है कि बड़े सपने देखें और उन सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर जुट जाएं। एक दिन यही सपने सच होते हैं।
आईआईटी के बाद आईपीएस, फिर आईएएस...
उनकी शिक्षा राजस्थान के आबू रोड शहर से हुई है। यहां दसवी क्लास तक पढऩे के बाद वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा चले गए। वहां पढ़कर आईआईटी (IIT)परीक्षा पास की। दिल्ली से मैकेनिक्स में आईआईटी पूरी करने के बाद बेंगलुरू में एक साल प्राइवेट कंपनी में नौकरी की।
इस दौरान उन्होंने ठान लिया कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और देशवासियों की सेवा करनी है। उन्होंने 2016 में यूपीएससी की सिविल परीक्षा पास की। उनका आईपीएस (IPS)के लिए सलेक्शन हुआ और यूपी कैडर मिला। आईपीएस की टे्रनिंग के दौरान ही उन्होंने आईएएस (IAS)परीक्षा पास कर ली। प्रोबेशन काल पूरा होने के बाद तीन महीने पहले ही उन्होंने किशनगढ़ में एसडीएम का पदभार संभाला है।
माता-पिता से मिली प्रेरणा...
उन्होंने बताया कि आज वो जिस मुकाम पर हैं, उसकी प्रेरणा उन्हें अपने माता पिता से मिली है। उनके पिता दयाराम यादव रेलवे में कार्यरत हैं और माता कैलाश यादव गृहिणी हैं। छोटा भाई उत्कर्ष रूड़की से आईआईटी कर रहा है। हाल ही में वह विवाह बंधन में बंधे है और उनकी पत्नी पेशे से डॉक्टर हंै।
करियर काउंसलिंग जरूरी...
एसडीएम देवेंद्र कुमार का मानना है कि करियर काउंसलिंग बच्चों और युवाओं के लिए बहुत जरूरी है। दसवीं क्लास वह अहम पड़ाव होता है जहां से उनके करियर की दिशा तय होती है। केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनकर ही भविष्य नहीं संवारा जा सकता बल्कि अन्य विषय भी बच्चों के करियर में मील का पत्थर साबित हो सकते है। युवाओं को अक्सर यह पता नहीं होता बहुत से ऐसे कोर्स हैं, जिनको करने से उनके सामने नौकरियों के कई विकल्प खुल जाते हंै। इसलिए समय समय पर करियर काउंसलिंग होनी चाहिए।