
कोलकाता
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य नियामक आयोग ने इलाज में लापरवाही के मामले में कोलकाता के नामी निजी अस्पताल ‘बी.एम. बिड़ला’ पर 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। कुछ दिन पहले अस्पताल में भारती पाल नामक एक वृद्ध महिला को भर्ती कराया गया था। उसे सीने में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह पर भारती की ईकोकार्डियो ग्राफी की गई थी। इसके बाद भारती की मौत हो गई थी। भारती के बेटे कौशिक पाल ने मां की मौत के लिए डॉक्टरों को दोषी ठहराते हुए राज्य के स्वास्थ्य नियामक आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। कौशिक का आरोप था कि ईकोकार्डियो ग्राफी करने वाला डॉक्टर योग्य नहीं था। उसकी गलती से उसकी मां की मौत हुई है। राज्य स्वास्थ्य नियामक आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले को मेडिकल काउंसिल को भेज दिया था। जिस डॉक्टर ने कौशिक की मां की ईकोकार्डियो ग्राफी की थी उसका सर्टिफिकेट जांच करने को कहा था। मेडिकल काउंसिल ने जांच की रिपोर्ट में बताया कि बी.एम. बिड़ला अस्पताल में जिस डॉक्टर ने कौशिक की मां की ईकोकार्डियो ग्राफी की है वह इस तरह की जांच के लिए योग्य नहीं है। उसके पास इसकी कोई डिग्री नहीं है। मामला लापरवाही का बनता है। राज्य स्वास्थ्य नियामक मामले में कार्रवाई कर सकता है। फिर आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को गलत इलाज की बलि चढ़ी भारती पाल के बेटे कौशिश को तत्काल प्रभाव से बतौर जुर्माना 20 लाख रुपए देने का निर्देश दिया।
अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी
स्वास्थ्य नियामक आयोग ने बी.एम.बिड़ला अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के अयोग्य डॉक्टरों से किसी का इलाज अथवा गंभीर जांच न कराए। समाचार लिखे जाने तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। अस्पताल के पदाधिकारी से टेलीफोन पर सम्पर्क करने पर उन्होंने कहा कि आयोग के आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। प्रति मिलने से पहले वे कुछ नहीं कह सकते।
पहले भी कई अस्पतालों पर लग चुका है जुर्माना
इससे पहले भी कोलकाता के अपोलो और आमरी जैसे बड़े निजी अस्पतालों पर इलाज में लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य नियामक आयोग जुर्माना लगा चुका है।
Published on:
03 Feb 2018 10:00 am
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