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बांसवाड़ा परियोजना प्रमुख रामस्वरूप को 32वां विवेकानन्द सेवा सम्मान

बंगाल के राज्यपाल करेंगे 18 को कोलकाता के कलाकुंज में आयोजित समारोह में सम्मानित

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कोलकाता. महानगर की साहित्यिक-सामाजिक संस्था बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय की ओर से 32वां विवेकानन्द सेवा सम्मान राजस्थान के बांसवाड़ा परियोजना प्रमुख रामस्वरूप महाराज को देने की घोषणा की गई है। मंत्री महावीर प्रसाद बजाज ने बताया कि रामस्वरूप को दक्षिण राजस्थान एवं पूर्वोत्तर राज्यों में कल्याणकारी सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समग्र वनवासी समाज उन्नयन में योगदान के लिए 18 फरवरी को कलाकुंज में आयोजित समारोह में राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी सम्मानित करेंगे। सम्मान स्वरूप उन्हें 1 लाख की राशि एवं मानपत्र प्रदान किया जाएगा। 3 जुलाई 1952 को राजस्थान के भरतपुर जिले के गोपालगढ़ में जन्मे रामस्वरूप की प्रारंभिक शिक्षा गोपालगढ़ में हुई। बाद में अलवर से 1972 में बीएससी की डिग्री प्राप्त की। अलवर में अध्ययन के दौरान वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने एवं तत्कालीन प्रचारक सोहनसिंह के प्रभावी व्यक्तित्व से प्रेरित होकर 1973 में एलएलबी (द्वितीय वर्ष) की पढ़ाई छोडक़र संघ प्रचारक बने। इसके बाद राजस्थान के अलवर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर व भरतपुर के जिला प्रचारक एवं विभाग प्रचारक का दायित्व निर्वहन किया। 1991 में संघ की योजना से बांसवाड़ा परियोजना के प्रमुख का दायित्व संभाला। कुमारसभा पुस्तकालय ने 1987 में स्वामी विवेकानन्द 125वीं जयन्ती के अवसर पर स्वामीजी के आदर्शों के अनुरूप समाजसेवा, संस्कार एवं सामाजिक पुनरुत्थान के लिए समर्पित व्यक्तियों/संस्थाओं के लिए इस वार्षिक सम्मान को शुरू किया था। प्रथम सम्मान नागालैंड की रानी गाइदिनल्यु को एवं गत वर्ष का सम्मान वरदान सेवा संस्थान के संस्थापक कमलेश कुमार, गाजियाबाद को दिया गया था।

क्या है बांसवाड़ा परियोजना?
1969 में स्थापित बांसवाड़ा परियोजना एक बहुआयामी परियोजना है जिसका उद्देश्य जनजाति बंधुओं को स्वयं की सहभागिता के साथ शिक्षा, संस्कार एवं स्वावलम्बन के मंत्र से स्वाभिमान जगाना है। आवासीय विद्यालय, लघु गणेश स्थापना, हनुमानमंदिर योजना, माही माता पूजन, संस्कृति दीक्षा (घर वापसी), यज्ञ अनुष्ठान यात्रा, तीर्थयात्रा, वेद विद्यालय, गोशाला तथा रामकथाओं के माध्यम से रामस्वरूप
न केवल राजस्थान, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में जनजातियों के समग्र उन्नयन में सेवा कार्य कर रहे हैं। केवल आवासीय विद्यालयों से लगभग 80 हजार से अधिक छात्रों ने शिक्षण प्राप्त किया है जिसमें से 2,200 छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्राध्यापक, पुलिस विभाग आदि में कार्यरत हैं। रामस्वरूप के प्रयास से जनजातियों में अपने धर्म एवं समाज के मूल्यों के प्रति गौरवबोध जागृत हुआ है जिसके फलस्वरूप हजारों की संख्या में घर वापसी हुई है। रामस्वरूप के नेतृत्व में यह परियोजना समाजसेवा, राष्ट्रसेवा एवं मानवसेवा के नए-नए आयाम प्रस्तुत कर रही है।