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महालया के एक माह बाद दुर्गा पूजा, 19 साल बाद पुन: आया संयोग

पश्चिम बंगाल की विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा के लिए इस बार लोगों को थोड़ा लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। आमतौर पर महालया का बंगाल के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। दरअसल महालया दुर्गा पूजा की शुरुआत और पितृपक्ष का समापन माना जाता है। इसी दिन मां दुर्गा से धरती पर आने की प्रार्थना की जाती है।

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महालया के एक माह बाद दुर्गा पूजा, 19 साल बाद पुन: आया संयोग

महालया के एक माह बाद दुर्गा पूजा, 19 साल बाद पुन: आया संयोग

मलमास या अधिकमास होने के कारण आया बदलाव
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा के लिए इस बार लोगों को थोड़ा लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। आमतौर पर महालया का बंगाल के लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। दरअसल महालया दुर्गा पूजा की शुरुआत और पितृपक्ष का समापन माना जाता है। इसी दिन मां दुर्गा से धरती पर आने की प्रार्थना की जाती है। एक वर्ष बाद मां के धरती पर आने की सूचना पाकर सभी लोग उत्साह व खुशी से झूम उठते हैं, क्योंकि मां के आगमन से सभी अमंगल का विनाश होता है। मलमास या अधिकमास होने के कारण इस साल नवरात्रि का पर्व पितृपक्ष की समाप्ति के अगले दिन शुरू न होकर एक महीने बाद प्रारंभ होगा। एक सामान्य वर्ष में महालया और महाषष्ठी के बीच का अंतर छह दिनों का होता है लेकिन, इस साल महाषष्ठी 22 अक्टूबर को है। नवरात्रि की कलश स्थापना 17 अक्टूबर को होगी।
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2001 में था ऐसा संयोग
मलमास या अधिकमास के कारण इससे पहले ऐसा संयोग 19 साल पहले 2001 में बना था। 1982 में भी ऐसा संयोग देखा गया था। जानकारों के अनुसार करीब १६० साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में पड़ रहे हैं। इस तरह नवरात्रि पर्व 17 अक्टूबर से शुरू होगा जो 25 अक्टूबर तक चलेगा। दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
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इस बार यह परम्परा नहीं हुई
महालया के दिन कोलकाता के मशहूर मूर्ति हब कुम्हारटोली के मूर्तिकार देवी दुर्गा की प्रतिमाओं की आंखें बनाते हैं और इस परंपरा को चोखु दान (चक्षु दान) कहा जाता है। इस साल दुर्गा पूजा एक महीने बाद शुरू होने के कारण यह परम्परा नहीं हुई।
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हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र पर्व शुरू होता है जो नवमी तिथि तक चलता है।
पंचमी- 21 अक्टूबर
षष्ठी- 22 अक्टूबर
सप्तमी- 23 अक्टूबर
अष्टमी- 24 अक्टूबर
नवमी- 25 अक्टूबर

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