23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वन्यजीव स्निफर डॉग की बहादुरी ने सुलझाए 400 मामले

देशभर में वन विभाग ने स्निफर डॉग की मदद से वन्यजीव अपराध के बड़ी संख्या में मामले सुलझाए हैं। स्निफर डॉग की वफादारी, बहादुरी व बुद्धिमता के साथ काम करने के कारण कई वन्यजीव अपराधी सलाखों में कैद हैं। आज देश के 19 राज्यों के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्कों में करीब 75 स्निफर डॉग तैनात है। इनकी मदद से वन्यजीव बरामदगी और अवैध शिकार के लगभग 400 मामले सुलझाने में सफलता मिली है।

2 min read
Google source verification
वन्यजीव स्निफर डॉग की बहादुरी ने सुलझाए 400 मामले

वन्यजीव स्निफर डॉग की बहादुरी ने सुलझाए 400 मामले

19 राज्यों में 75 स्निफर डॉग हैं तैनात
कई शिकारी फंस चुके हैं कानून के चंगुल में
हर वक्त टीम के साथ करते हैं ड्यूटी
कोलकाता.
देशभर में वन विभाग ने स्निफर डॉग की मदद से वन्यजीव अपराध के बड़ी संख्या में मामले सुलझाए हैं। स्निफर डॉग की वफादारी, बहादुरी व बुद्धिमता के साथ काम करने के कारण कई वन्यजीव अपराधी सलाखों में कैद हैं। आज देश के 19 राज्यों के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्कों में करीब 75 स्निफर डॉग तैनात है। इनकी मदद से वन्यजीव बरामदगी और अवैध शिकार के लगभग 400 मामले सुलझाने में सफलता मिली है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में आए दिन अवैध शिकार होते हैं और बाघ व तेंदुए के शरीर के अंग, खाल, दांत व नाखून तथा हाथी के दांत निकाल ले जाते हैं। वन विभाग की टीम के शिकंजे से शिकारी दूर हो जाते हैं और उनका किसी तरह का सुराग नहीं मिलता है तब स्निफर डॉग की मदद ली जाती है जो इस मुश्किल काम को सफलतापूर्वक पूरा करके दिखाते हैं।
--
किस राज्य में कौन सा स्निफर डॉग
पश्चिम बंगाल में ऑरलैंडो, श्याना व रानी भी तैनात है जबकि असम में तैनात स्निफर डॉग क्वार्मी को वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए विशेष पुरस्कार मिल चुका है। वहीं मध्यप्रदेश में निर्मन, मयना, टीना नाम के स्निफर डॉग प्रत्येक वन्यजीव अपराधी को आसानी से खोज निकालते हैं। निर्मन 35 और मयना 18 मामले सुलझाने में मदद कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ वन विभाग के 25 मामले सुलझाने में सहायता करने वाले स्निफर डॉग नेरो व सिम्बा अचानकमार टाइगर रिजर्व में तैनात है। उत्तराखंड के देहरादून में राजाजी व कॉर्बेट तैनात है जबकि कर्नाटक के नागरहोल टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार करने के बाद फरार शिकारियों तक पहुंचाने वाले स्निफर डॉग राणा सभी का चहेता बन गया है। अरुणाचल प्रदेश वन विभाग टाइगर रिजर्व में पहली बार स्निफर डॉग तैनात कर रहा है।
--
रेलवे में भी ली मदद
रेलवे सुरक्षा बल ने भी वन्यजीव तस्करी पर काबू पाने के लिए पहली बार स्निफर डॉग की जरूरत महसूस की। इस वर्ष उत्तरी व पूर्वी क्षेत्र में एक-एक डॉग को ड्यूटी पर लगाया है। भारत में 2008 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के सहयोग से ट्रैफिक भारत कार्यालय ने स्निफर और ट्रैकर डॉग प्रशिक्षण कार्यक्र शुरू किया गया था। इनकी उम्र छह से नौ महीने के बीच होती है तब प्रशिक्षण का पहला चरण शुरू होता है। इसके बाद उनके व्यक्तिगत हैंडलर्स को आवंटित किया जाता है जहां दोनों के बीच भरोसेमंद और करीबी संबंध बन जाते हैं।
--
अगले बैच में शामिल होंगे देशी डॉग
भारतीय वन अधिकारी व ट्रैफिक भारत के प्रमुख डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि अगले बैच में भारतीय नस्ल के डॉग भी शामिल किए जाएंगे। हमने पिछले बैच में भी कोशिश की थी लेकिन उपलब्ध नहीं हो पाए थे। भारत में कोम्बाई, मुधोल हाउंड, हिमाचली हाउंड, राजापालयम, कन्नी, चिप्पिपराई सहित और भी कई देशी नस्ले हैं। देशी नस्ल के डॉग स्निफर डॉग के रूप में ज्यादा बेहतर काम कर सकते हैं। हाल में पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय नस्ल के डॉग्स की बहादुरी तथा देशी नस्ल के डॉग घर में लाने का संदेश दिया था।
---
वन्यजीव अपराध चुनौती बनता जा रहा है। शिकारी और तस्कर गिरफ्त में नहीं आ पाते हैं। ऐसे में वन्यजीव अपराध रोकने की लड़ाई में वन्यजीव स्निफर डॉग का उपयोग एक गेम चेंजर के रूप में सामने आया है। बाघ के अवैध शिकार के भी कई मामले सुलझ गए।
- डॉ. साकेत बडोला, आईएफएस व प्रमुख, ट्रैफिक भारत कार्यालय