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गैस कमी की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ममता ने दिए सख्त निर्देश

नवान्न में की उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कोलकाता. पश्चिम बंगाल में बढ़ती गैस कमी की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के लिए आवंटित गैस राज्य के भीतर […]

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नवान्न में की उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में बढ़ती गैस कमी की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राज्य सचिवालय नवान्न में आयोजित एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के लिए आवंटित गैस राज्य के भीतर ही रहे और इसे कहीं और डायवर्ट न होने दिया जाए। जिला प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गैस की अवैध तस्करी और कालाबाजारी की रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को किसी भी तरह की डायवर्जन को रोकने और सुचारु रूप से वितरण जारी रखने के लिए आपूर्ति श्रृंखला पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया। बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए किसी भी तरह की जमाखोरी या अवैध भंडारण का पता लगाने के लिए उन्होंने जिला मजिस्ट्रेटों को गैस वितरण केंद्रों और गोदामों पर अचानक निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने को कहा

उन्होंने गैस के अवैध भंडारण या ऊंचे दामों पर बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। समीक्षा बैठक के दौरान सीएम ममता ने अधिकारियों को गैस कंपनियों के साथ समन्वय बनाए रखने और आपूर्ति को प्रभावित करने वाली लॉजिस्टिक या तकनीकी समस्याओं का समाधान करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने दोहराया कि प्रशासनिक लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार की प्राथमिकता घरों और व्यवसायों के लिए गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री उन्होंने पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने और वितरण केंद्रों के आसपास मजबूत उपस्थिति बनाए रखने को कहा।

केंद्र सरकार पर हमलावर हुई तृणमूल

मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा कि मोदी सरकार की सारी क्षमता केवल देश के गरीब और कमजोर वर्ग को लगातार लंबी कतारों में खड़ा करने तक ही सीमित लगती है। नोटबंदी से लेकर अनियोजित लॉकडाउन तक, कोविड-19 के दौरान ऑक्सीजन के लिए हाहाकार से लेकर एसआइआर प्रक्रिया और अब एलपीजी संकट तक, आम जनता को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। भट्टाचार्य ने कहा कि यह सरकार हर महत्वपूर्ण मौके पर राष्ट्र को असफल रही है। इस असफलता के लिए प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नीति निर्धारण में पूरी तरह से पंगु और निर्णय लेने में विफल है। दिल्ली में ठहराव के बीच, आम नागरिक गैस के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ईंधन संकट निर्मित आपदा

मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि गैस की कीमत, आपूर्ति श्रृंखला और वितरण केंद्र नियंत्रित करता है। फिर भी एलपीजी संकट के समय मोदी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उनकी कोई योजना, कोई समन्वय और कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने ईंधन संकट को निर्मित आपदा बताते हुए कहा कि यह संकट 12 वर्षों की भारी अक्षमता, लगातार खराब प्रबंधन और ऐसी सरकार की छाप छोड़ता है, जो आम नागरिकों की आवश्यकता के समय शर्मनाक तरीके से अनुपस्थित रहती है। यह संकट सिर्फ रसोई तक ही सीमित नहीं बल्कि वाणिज्यिक सिलेंडरों की कमी होटलों, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायों की आजीविका को प्रभावित कर रही है। छोटे उद्यम जो वर्षों की मेहनत और सीमित मुनाफे पर आधारित हैं, अब आपूर्ति श्रृंखला की विफलता से मुश्किल में हैं, जिसे मोदी सरकार या तो सुधार नहीं सकती या जिसकी उन्हें परवाह ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिम्मेदार प्रशासनिक कदम उठाते हुए तुरंत सभी ईंधन आपूर्ति कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और लोगों की सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक एसओपी लागू किया।