मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि गैस की कीमत, आपूर्ति श्रृंखला और वितरण केंद्र नियंत्रित करता है। फिर भी एलपीजी संकट के समय मोदी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। उनकी कोई योजना, कोई समन्वय और कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने ईंधन संकट को निर्मित आपदा बताते हुए कहा कि यह संकट 12 वर्षों की भारी अक्षमता, लगातार खराब प्रबंधन और ऐसी सरकार की छाप छोड़ता है, जो आम नागरिकों की आवश्यकता के समय शर्मनाक तरीके से अनुपस्थित रहती है। यह संकट सिर्फ रसोई तक ही सीमित नहीं बल्कि वाणिज्यिक सिलेंडरों की कमी होटलों, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायों की आजीविका को प्रभावित कर रही है। छोटे उद्यम जो वर्षों की मेहनत और सीमित मुनाफे पर आधारित हैं, अब आपूर्ति श्रृंखला की विफलता से मुश्किल में हैं, जिसे मोदी सरकार या तो सुधार नहीं सकती या जिसकी उन्हें परवाह ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिम्मेदार प्रशासनिक कदम उठाते हुए तुरंत सभी ईंधन आपूर्ति कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और लोगों की सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक एसओपी लागू किया।