
मतदान केंद्र पर होगी वेबकास्टिंग
कोलकाता. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को दिल्ली रवाना होने से पहले आयोजित एक संवाददाता सम्मलेन में कहा कि चुनाव आयोग आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को हिंसा और डर से मुक्त माहौल में कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें गहरी हैं और यहां मतदान प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से ऊंचा रहा है। उन्होंने मतदाताओं से शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने में सहयोग की अपील की और चुनाव अवधि को राज्य के लिए गर्व का विषय बताया।
मतदान केंद्र पर होगी वेबकास्टिंग
ज्ञानेश कुमार ने आश्वासन दिया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में जारी अंतिम मतदाता सूची में 7.08 करोड़ नाम शामिल हैं और न्यायिक विचाराधीन मामलों को छोड़कर वर्तमान में 6,44,52,609 मतदाता पात्र के रूप में सूचीबद्ध हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि हर मतदान केंद्र पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की जाएगी और इस प्रक्रिया की चुनाव आयोग के कर्मियों द्वारा करीबी निगरानी की जाएगी। युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी कॉलेजों में अभियान चलाकर युवाओं को मतदान प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि 'पश्चिम बंगाल के चुनावों की तैयारी की समीक्षा के लिए पूरा आयोग पिछले 2 दिन से राज्य में है और चुनाव की हर तैयारियों पर पूरी समीक्षा के साथ ही चुनाव के आधार स्तंभ बीएलओ के साथ चर्चा की। इस दौरान नए मतदाताओं को प्रतीकात्मक रूप से मतदाता पहचान पत्र भी प्रदान किए गए। उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटों में से 210 सामान्य श्रेणी की हैं, 68 अनुसूचित जाति के लिए और 16 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
आयोग ने लिए कई नए निर्णय
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव कराने की प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने कई नए निर्णय भी लिए हैं। इन निर्णयों के तहत डाक मतपत्रों की गिनती ईवीएम की गिनती के पहले दो चरणों से पहले पूरी कर ली जानी अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि जब मतदान की प्रक्रिया संपन्न हो जाती है, तो पीठासीन अधिकारी मतदान एजेंटों को फॉर्म 17सी उपलब्ध कराते हैं। जब ईवीएम की गिनती पूरी हो जाती है और दोनों के मिलान की प्रक्रिया होती है, यदि मिलान सामान्य रूप से हो जाता है तो प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है। लेकिन यदि मिलान में किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है, तो संबंधित ईवीएम की पूरी वीवीपैट पर्चियों की गिनती मतगणना एजेंटों की उपस्थिति में की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पराजित उम्मीदवार मतगणना के सात दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क के साथ अपनी ईवीएम की जांच कराना चाहता है, तो उसके लिए भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को चुनाव अवधि के दौरान बिना किसी भय या पक्षपात के कानून का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
Published on:
11 Mar 2026 12:39 pm
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