
दिल्ली से बंगाल तक सियासत गर्म
कोलकाता नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा की गूंज सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली से लेकर बंगाल के कोलकाता में सुनाई दी। राज्य के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। राज्यपाल त्रिपाठी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें राज्य की स्थिति के बारे में जानकारी दी। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सोमवार को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा गया गृह मंत्रालय का परामर्श विपक्ष शासित राज्यों में गहरी साजिश और सत्ता हथियाने की चाल है। इधर, भाजपा के बंगाल प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बंगाल में पांच पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद सोमवार को मांग की कि केन्द्र सरकार राज्य के हालात के अध्ययन के लिए केन्द्रीय दल भेजे तथा राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में विचार करे।वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कहा है कि केंद्र, भाजपा के कैडर पश्चिम बंगाल में हिंसा भडक़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे (भाजपा) जानते हैं कि जिस हिम्मत से मैं उनके खिलाफ बोलती हूं, इस तरह कोई नहीं बोल सकता और इसी लिए वे मेरी आवाज कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। वे भाजपा को राज्य में दंगा करने नहीं देंगी और न ही राज्य सरकार को अस्थिर करने देंगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि वह किसी पार्टी को अपनी सरकार गिराने नहीं देंगी। इधर भाजपा ने सोमवार को राज्य भर में काला दिवस मनाकर बिगड़ती कानून व्यवस्था का विरोध किया। पार्टी ने हिंसाग्रस्त बशीरहाट उप संभाग में 12 घंटे का बंद भी आयोजित किया। जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। भाजपा बंद के दौरान दुकानें बंद रहीं। सडक़ें वीरान नजर आईं और बंद समर्थकों ने रेल पटरी पर एकत्र होकर सियालदाह को जोडऩे वाली रेल सेवाओं को रोका। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वैचारिक रूप से भाजपा चुनी हुई सरकार का कार्यकाल पूरा करने देने की पक्षधर है। राज्य के लोगों के जानमाल की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कसम खाकर विरोधियों को मिटा देने की बात कह रहीं हैं। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में सोचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को पश्चिम बंगाल के हालात के अध्ययन के लिए केन्द्रीय दल को भेजना चाहिए। वहां के हालात बेहद खराब हो चुके हैं, चुनाव बीत चुके हैं लेकिन राजनीतिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है और मुख्यमंत्री द्वारा बेहद आपत्तिजनक व भडक़ाऊ बयान दिये जा रहे हैं।
Published on:
10 Jun 2019 05:54 pm

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