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Election War in West Bengal: 2021 की हार से सबक, फूंक-फूंक कर कदम रख रही भाजपा

पश्चिम बंगाल (West Bengal ) में 2026 के विधानसभा चुनाव (2026 assembly elections) को लेकर अभी से हलचल तेज है। भाजपा (BJP) ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। पार्टी 2021 की हार (2021 defeat) से सबक (lesson) लिया है। पार्टी इस बार बड़े पैमाने पर तैयारी कर रही है।

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Election War: 2021 की हार से सबक, फूंक-फूंक कर कदम रख रही भाजपा

भाजपा : आक्रामक आंदोलन

2026 के चुनाव को लेकर अभी से बना रही रणनीति

भाजपा का लक्ष्य तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करना है। इसके लिए पार्टी संगठन को मजबूत करने से लेकर मतदाताओं तक प्रभावी तरीके से पहुंचने की योजना बनाई गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2026 के चुनावी समर में भाजपा की यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है। भाजपा के एक वरिष्ठ केंद्रीय नेता ने बताया कि पार्टी ने इस बार संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। 2021 के चुनाव में कई दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भाजपा में जगह दी गई थी लेकिन, चुनाव के बाद वे लौट गए। इस बार पार्टी बेहद सोच-समझकर कदम रख रही है और केवल समर्पित कार्यकर्ताओं पर भरोसा किया जाएगा।

मार्च के दूसरे हफ्ते तक नया प्रदेश अध्यक्ष

भाजपा नेता ने बताया कि पार्टी में संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया धीरे-धीरे पूरी की जा रही है। मंडल अध्यक्षों की घोषणा पहले हो चुकी है, जबकि सांगठनिक जिला अध्यक्षों के नाम लगभग तय हो चुके हैं। मार्च महीने के पहले हफ्ते तक जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी जाएगी और इसके बाद एक हफ्ते के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा होते ही भाजपा पूरे राज्य में चुनावी अभियान में पूरी ताकत झोंक देगी।

जनसंपर्क, आक्रामक आंदोलन पर जोर

पार्टी के नेता के मुताबिक, भाजपा ने इस बार 50 लाख नए सदस्य बनाए हैं, जो लगभग 50 लाख परिवारों तक पहुंचने का संकेत है। पार्टी का मानना है कि यदि वो इन सदस्यों का समर्थन बनाए रखती है और कुल मतों का एक-तिहाई हासिल कर लेती है, तो सत्ता पर कब्जा जमाने में सफल हो सकती है। भाजपा बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना बना रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जल्द ही सडक़ पर उतरकर तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रामक आंदोलन शुरू किया जाएगा। भाजपा का इरादा गलत नीतियों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार को घेरना है और जनता को अपने पक्ष में करना है।

माकपा की भी नजर चुनाव पर, हर हालात के लिए तैयार

दूसरी तरफ माकपा की भी विधानसभा चुनाव पर नजर है। 80 सदस्यीय नई राज्य समिति के गठन में माकपा ज्यादा प्रयोग करने के पक्ष में नहीं दिखी। इसका मुख्य कारण आगामी विधानसभा चुनाव है। पार्टी अकेले लडऩे या कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की पुरानी रणनीति जारी रखने, दोनों ही परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहती है। अप्रेल में तमिलनाडु के मदुरै में प्रस्तावित माकपा के 24वें पार्टी कांग्रेस के लिए जारी राजनीतिक प्रस्ताव के मसौदे में स्वतंत्र राजनीतिक रणनीति पर अधिक जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि पार्टी को अपने स्वतंत्र अभियान और जन आंदोलन को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि सिर्फ चुनावी गठबंधन पर निर्भर रहना चाहिए। नई राज्य समिति में पार्टी के छात्र और युवा शाखा से एक भी नेता नहीं है, जबकि नेतृत्व लगातार नए चेहरों को आगे लाने की बात कर रहा था। दूसरा सवाल उत्तर 24 परगना जिले के पूर्व जिला सचिव मृणाल चक्रवर्ती को लेकर है। आंतरिक चुनाव में पराजित होने के बावजूद उन्हें नई राज्य समिति में शामिल किया गया है।

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