19 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मंजिल होती है आसान

मंजिल को पाने के लिए उसके पीछे होना पड़ता है पागल-केंद्रीय विद्यालय, बामनगाछी के प्रिंसिपल रूपिंदर सिंह

2 min read
Google source verification
इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मंजिल होती है आसान

इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मंजिल होती है आसान

krishnadas parth

kolkata.

मजदूर पिता के प्रिंसिपल बेटा रूपिंदर सिंह (roopinder singh) का कहना है कि मंजिल को पाने के लिए उसके पीछे पागल होना पड़ता है। आज मैं जिस पद पर पहुंच पाया हूं, उसके पीछे सच्ची लगन और मेहनत ही है। वे बताते हैं कि वे हरियाणा (hariyana) के गांव के एक गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता मजदूरी करते थे। हम परिवार में 5 भाई बहन थे और मैं उनमें सबसे बड़ा था। मां घर का काम करती थीं। कक्षा 10तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से पूरी करने के बाद 11वीं कक्षा में दाखिला लिया लेकिन सफल नहीं हो पाया। पिता ने इसके लिए बहुत समझाया और हौसला दिया। घर की हालत बहुत कमजोर थी क्योंकि पिता ही एक मात्र आजीविका के साधन थे।

मां की आंखों की रोशनी जब चली गई

इसी दौरान बीमारी के कारण मां की आंखों की रोशनी चली गई। घर का बड़ा बेटा होने के नाते अब स्कूल जानें से पहले घर का काम भी करना पड़ता था। तथा पढ़ाई के साथ-साथ पिता के साथ मजदूरी पर भी जाना पड़ता था। 12वीं कक्षा में पढ़ते-पढ़ते और भी जिम्मेदारियां बढ़ गई।

जीवन का एक मात्र लक्ष्य था कामयाब होना

रूपिंदर सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित किया कि उन्हें जीवन में कामयाब जरूर होना है। बस इसी उद्देश्य के लिए एक लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई में लगे रहे। अपनी स्नातकोत्तर और बीएड की शिक्षा पूरी करने के बाद एक निजी स्कूल में लगभग 5 वर्षो तक शिक्षण कार्य किया। बाद में माता-पिता के आशीर्वाद तथा अपने उद्देश्य के प्रति सच्ची लगन और लगातार मेहनत से जवाहर नवोदय विद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षक के रूप में नियुक्ति मिली। लगभग एक वर्ष तक वहां सेवाएं देने के बाद केन्द्रीय विद्यालय संगठन (kendriya vidyalaya sangathan) में स्नातकोत्तर शिक्षक के रूप में शामिल हुआ। आज केंद्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हूं।
--
केंद्रीय विद्यालय, बामनगाछी (Kendriya Vidyalaya, Bamangachi) का 2015 में संभाला कार्यभार

रूपिंदर सिंह बताते हैं कि केंद्रीय विद्यालय, बामनगाछी का मैं बतौर प्रिंसिपल 2015 के दिसंबर में कार्यभार संभाले। तब उनके सामने कई चुनौतियां थी। सबसे बड़ी चुनौती विद्यालय के परीक्षा परिणाम को लेकर थी। तब विद्यालय का परिणाम बहुत अच्छा नहीं होता था। आज यह विद्यालय 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 100 में सौ फीसदी परिणाम लाता है। आज यह विद्यालय केवी कोलकाता रिजन में हर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। इसके लिए विद्यालय के शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावक बधाई के पात्र हैं। उनके सहयोग के बिना यह सफलता हासिल करना मुश्किल था। इस स्कूल में 13 सौ से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।

सफलता हासिल करने के लिए आधार को मजबूत करना जरूरी

उनका कहना है कि हमारी शुरू से योजना रही है कि सफलता हासिल करने के लिए बेस (आधार) को मजबूत होगा। यही कारण है कि अब हम क्लास एक के बच्चों पर उतना ही ध्यान दे रहे हैं जितना कि 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा देनेवाले बच्चों पर। क्योंकि बच्चे ही विद्यालय का नाम रोशन करते हैं।