नई दिल्ली/कोलकाता. भारतीय वैज्ञानिकों ने हिन्दू धर्म में को 'ब्रह्म धारा' मानी गई आस्था को वैज्ञानिक मान्यता दी है। वैज्ञानिक शोध में गंगाजल में कुछ ऐसे वायरस होने की पुष्टि हुई है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारकर पानी को शुद्ध रखता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (आईएमटेक), चंडीगढ़ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं के शोध में यह तथ्य सामने आया है। इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ मुख्य वैज्ञानिक डॉ.एस.माइलराज ने शोध परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि गंगाजल में कुछ नए वायरस मिले हैं जिनका इस्तेमाल दवाईयां बनाने में किया जा सकता है।
वायरस खत्म कर सकते हैं रोग
शोध में गंगाजल में 20-25 ऐसे वायरस मिले हैं, जिनका इस्तेमाल टीबी, टायफाइड, कालरा, डायरिया, निमोनिया, दिमागी बुखार जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है। केन्द्रीय जल संसाधन व गंगा संरक्षण मंत्रालय के आदेश से किए गए शोध में आईएमटेक के अलावा नेशनल इन्वायरमेन्ट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, नागपुर, नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे अग्रणी संस्थान शामिल थे। हालांकि लाभकारी वायरस की खोज आईएमटेक, चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने की है। उक्त रिपोर्ट दिसम्बर 2016 में मंत्रालय को सौंपी जाएगी। इससे पहले भी बहुत से भारतीय और विश्व के अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने गंगाजल में इस तरह के वायरस की खोज की थी, लेकिन उनकी पहचान का श्रेय आईएमटेक चंडीगढ़ को मिला।