
रेडीमेड व्यवसाय में मंदी, बेरोजगार हो रहे कारीगर
रेडीमेड व्यवसाय में मंदी, बेरोजगार हो रहे कारीगर
-हावड़ा के दस हजार कारीगरों के सामने खड़ा हुआ संकट
- कारीगरों को हटा रहे है रेडीमेड कारखाने के मालिक
हावड़ा
हावड़ा शहर के रेडीमेड कपड़ा तैयार करने वाले व्यापारी मंदी की मार झेल रहे हैं। हावड़ा स्थित एशिया के सबसे बड़े कपड़ा बाजार मंगलाहाट में भी रेडीमेड कपड़ों की मांग घट रही है। व्यापार घाटे में चल रहा है। जिसका असर जिले के लगभग 10 हजार कारीगरों पर पड़ रहा है। उनका रोजगार छिन रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि कपड़ा उधार पर नहीं मिलता है। बाजार में मांग कम हुई है। मंगलाहाट के साथ ही कोलकाता के मेटियाब्रुज व हाथी बागान रेडीमेड बाजार में रेडीमेड कपड़े की मांग कम हुई है।
व्यापारियों के मुताबिक पहले मंगलाहाट में जहां व्यापारी औसतन 10-15 लाख का माल सप्ताह में बेचते थे। अब ब्रिकी आधी हो गई। इसलिए कारीगरों की संख्या में कटौती करनी पड़ रही है। कारखाने में काम नहीं होने से मशीनें नहीं चल पा रही हैं। उनके खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।
दूसरे राज्यों से कम आ रहे खरीदार
रेडीमेड कपड़ों की मांग में गिरावट का कारण दूसरे प्रदेशों से आने वाले ग्राहकों की घटती संख्या है। पहले मंगलाहाट में बिहार, उत्तरप्रदेश, असम, त्रिपुरा, ओडि़शा व अन्य राज्यों के व्यापारी आते थे। अब उनकी संख्या कम हो गई है।
कपड़े के कारीगर शेख जहांगीर ने बताया कि नोटबंदी से पहले उसकी मासिक आमदनी 20 हजार तक थी जो अब 10 हजार पर आकर टिक गई है। मजबूरी में यह काम छोडऩा चाहते हैं। ज्यादातर कारीगरों का यही हाल है। उन्होंने 100 दिन रोजगार गारंटी योजना में काम करना शुरू कर दिया है। हावड़ा में रेडीमेड कपड़े से करीब दस हजार से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं।
हावड़ा में यहां तैयार होता है रेडीमेड कपड़ा
कोलकाता व हावड़ा के तीन बड़े बाजारों में बिकने वाला ज्यादातर रेडीमेड कपड़ा शहर के सलकिया, बांधाघाट, गोलाबाड़ी, बेंटरा, शिवपुर, डोमजूर के बाकड़ा, निब्रा, शाखारिदह, रानीहाटी, रानीयाड़ा व अन्य जगहों पर तैयार होता है।
क्या कहना है व्यापारी का
हावड़ा शहर के रेडीमेड कपड़ा व्यापारी अशोक डागा का कहना है कि व्यापार में मंदी छायी हुई है। बिक्री आधी से कम हो गई है। मजदूरों को बैठाकर पैसा देना मुश्किल होता था। 30 फीसदी मजदूर कम करना पड़ा है।
सलकिया के व्यवसायी संजय बछावत ने कहा कि बाजार में मंदी के कारण कपड़ा देने वाले व्यापारी को समय पर पैसा नहीं दे पा रहे हैं।
रेडीमेड व्यापारी नवरतन मल दुगड़ का कहना है कि पहले की तुलना में बिक्री कम हो गई है। व्यापार करना इन दिनों बड़ी चुनौती है।
शाखारिदह के रेडीमेड कपड़ा तैयार करने वाले जाकिर मुफ्ती ने बताया कि पहले बाजार में सप्ताह में पांच लाख के कपड़े बेचते थे, अभी यह आंकड़ा एक लाख है। काम नहीं है, 35 मजदूर थे अब सिर्फ 10 मजदूर है। क्या करें काम नहीं है। इस लिए कारीगरों को हटा रहे हैं।
Published on:
08 Sept 2019 10:44 pm
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