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कोर्ट में हंगामा, अमित शाह पर गंभीर आरोप… I-PAC ऑफिस में रेड के बाद कैसे बदल गई बंगाल की सियासी तस्वीर?

पश्चिम बंगाल में I-PAC ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय की रेड के बाद से सियासी पिक्चर बदल गई है। बात अदालत से लेकर भ्रष्टाचार तक के मुद्दे तक पहुंच चुकी है। दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारी हंगामे के बाद शुक्रवार को ईडी बनाम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मामले में सुनवाई टाल दी। कोर्टरूम में माहौल ठीक […]

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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (फोटो- IANS)

पश्चिम बंगाल में I-PAC ऑफिस में प्रवर्तन निदेशालय की रेड के बाद से सियासी पिक्चर बदल गई है। बात अदालत से लेकर भ्रष्टाचार तक के मुद्दे तक पहुंच चुकी है। दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारी हंगामे के बाद शुक्रवार को ईडी बनाम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मामले में सुनवाई टाल दी।

कोर्टरूम में माहौल ठीक न होने का हवाला देते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी, 2026 को तय की। कोर्टरूम में बड़ी संख्या में वकीलों की मौजूदगी के कारण काफी भीड़ थी।

ईडी ने दायर की थी याचिका

याचिका ईडी ने पश्चिम बंगाल में चल रहे हाई पॉलिटिकल ड्रामे के बीच दायर की थी, जो गुरुवार को तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस पहुंचीं। मुख्यमंत्री ऐसे समय में वहां पहुंची, जब ईडी 2020 के कोयला तस्करी मामले में तलाशी अभियान चला रही थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक रिट याचिका में, ईडी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पुलिस पर आरोप लगाया कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम कर रही है।

28 पन्नों की याचिका में, ED ने कहा कि राज्य पुलिस ने उसके अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने से रोका।

कब बिगड़ गई स्थिति?

एजेंसी ने आरोप लगाया कि स्थिति तब और बिगड़ गई जब गुरुवार को मुख्यमंत्री ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर में ED की तलाशी के दौरान प्रवेश किया।

एजेंसी के अनुसार, ममता रेड के दौरान जबरन अपने साथ कुछ 'महत्वपूर्ण सबूत' (जिसमें फिजिकल डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल थे) लेकर चली गईं।

ED ने कहा कि उसने राज्य पुलिस और मुख्यमंत्री द्वारा किए जा रहे अधिकार के दुरुपयोग को तुरंत रोकने के लिए हाई कोर्ट में अपनी रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने के लिए संपर्क किया।

भाजपा ने खड़े किए 3 सवाल

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही राज्य सरकार के कामकाज में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म की कथित भूमिका पर सवाल उठाया।

एक्स पोस्ट में बीजेपी पश्चिम बंगाल ने ममता से तीन सवाल किए। पोस्ट में कहा गया- ममता बनर्जी के अनुसार, IPAC तृणमूल का इंचार्ज है। अगर वे पार्टी चलाने और टिकट व संगठनात्मक पदों का फैसला करने के लिए किसी प्राइवेट एजेंसी को चाहते हैं तो यह उनका अंदरूनी मामला है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के डॉक्यूमेंट्स IPAC ऑफिस में क्या कर रहे थे?

भाजपा ने यह भी सवाल क्या IPAC पश्चिम बंगाल सरकार के कामकाज में दखल दे रहा है? पार्टी ने इसे संविधान के लिए सीधी चुनौती बताया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि नौकरशाह एक प्राइवेट एजेंसी को रिपोर्ट करते दिख रहे हैं।

भाजपा ने पूछा कि क्या राज्य के बाहर की कोई एजेंसी शासन को प्रभावित कर रही है? भाजपा ने कहा- अगर ऐसा है तो यह संविधान के लिए एक सीधी चुनौती है, जहां नौकरशाही एक प्राइवेट एजेंसी को रिपोर्ट करती दिख रही है। पहले भी, हमने नौकरशाहों द्वारा IPAC कर्मचारियों को पश्चिम बंगाल सरकार के कैंपेन का फैसला करने के लिए भेजे गए ईमेल देखे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के लोगों के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या राज्य के बाहर की कोई एजेंसी, जिसमें दूसरे राज्यों के लोग काम करते हैं, सरकार के कामकाज में दखल दे रही है।

ममता को भेजा गया कानूनी नोटिस

उधर, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें उनसे 72 घंटे के अंदर अपने दावों के सबूत पेश करने और कोयला तस्करी मामले को लेकर उन पर लगाए गए आरोपों को साबित करने की मांग की गई है।

अधिकारी ने कहा कि ऐसा न करने पर उन्हें मानहानि के लिए उचित सिविल और आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

अपने एक्स पोस्ट में अधिकारी ने लिखा- आज, सीएम ममता ने ED की चल रही जांच से ध्यान भटकाने की कोशिश में, मेरे खिलाफ बिल्कुल निराधार मानहानिकारक आरोप लगाए, मुझे माननीय केंद्रीय गृह मंत्री के साथ एक 'कथित' कोयला घोटाले से जोड़ा।

उन्होंने आगे लिखा- ये लापरवाह बयान बिना किसी सबूत के सार्वजनिक रूप से दिए गए। ऐसे निराधार दावों ने न केवल मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल किया, बल्कि सार्वजनिक चर्चा की गरिमा को भी कम किया।

अधिकारी ने लिखा- आज, मैंने अपने वकील के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें उनसे 72 घंटे के भीतर सभी कथित सबूत देने की मांग की गई है। यदि वह ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो मैं मानहानि के लिए उचित सिविल और आपराधिक कार्रवाई करूंगा।

क्या है ममता का आरोप

बता दें कि ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी कथित कोयला घोटाले में शामिल थे और दावा किया कि घोटाले का पैसा अधिकारी के माध्यम से अमित शाह तक पहुंचाया गया था।

मुख्यमंत्री ने ये टिप्पणियां गुरुवार को कोलकाता में I-PAC कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के विरोध के बीच एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कीं।

बनर्जी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा- आप जानते हैं कि चुनाव आयोग में कौन बैठा है। वह अमित शाह के सहकारिता विभाग के सचिव थे। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। अगर ज्ञानेश कुमार वोट गायब कर रहे हैं, तो मैं चुप क्यों रहूंगी?

उन्होंने आगे कहा- अगर वोटर के अधिकार छीने जाएंगे, तो मैं आपके अधिकार छीन लूंगी। TMC सांसदों को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करते समय बेरहमी से घसीटा गया। सभी एजेंसियों पर कब्जा कर लिया गया है। वे हरियाणा और बिहार में जबरदस्ती सत्ता में आए। एक और राज्य में वे जबरदस्ती सत्ता में आए।

ममता ने कहा- अब वे बंगाल में ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। कोयला घोटाले का पैसा किसे मिलता है? अमित शाह को मिलता है। पैसा सुवेंदु अधिकारी के जरिए जाता है। पैसा BJP नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के जरिए सुवेंदु अधिकारी तक जाता है। सुवेंदु अधिकारी इसे अमित शाह को भेजते हैं।