
Meira Kumar-मैं बंगाल की ही बेटी हूं : मीरा कुमार
उनके पिता पूर्व उपप्रधान मंत्री जगजीवन राम बांग्ला धाराप्रवाह पढ़ते और बोलते थे
-रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाए गए संगठन का शताब्दी समारोह
-कैप्शन : कार्यक्रम का उद्घाटन करते पूर्व राज्यपाल श्यामल सेन, पास में है बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद, मीरा कुमार और अन्य अतिथि।
केडी पार्थ.
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार (Former Speaker of Lok Sabha Meira Kumar) ने रविवार को कहा कि वे बंगाल की ही बेटी हैं। उनके दिवंगत पिता पूर्व उपप्रधान मंत्री जगजीवन राम (Former Deputy Prime Minister Jagjivan Ram) बांग्ला धाराप्रवाह पढ़ और बोल लेते थे। उनके जन्मदिन पर जगजीवन राम ने उन्हें बांग्ला साहित्य की कई किताबे भेंट की थी। मीरा ने कहा कि वे रवींद्रनाथ, बंकिमचंद्र, शरत चट्टोपाध्यय को अच्छी तरह से पढ़ा है। वे रवींद्रनाथ ठाकुर के बनाए गए संगठन के सौ साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में बतौर अतिथि बोल रही थी।
ं बड़ी संख्या में बुद्धिजीविओं ने लिया भाग
राजारहाट न्यूटाउन स्थित सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी (Sister Nivedita University) परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ क्रमश: राज्यपाल द्वारा किया गया। सीवी आनंद बोस और उनकी पत्नी ने भी इसमें हिस्सा लिया। पूर्व स्पीकर मीरा कुमार, सांसद प्रदीप भट्टाचार्य, आयोजकों में से एक, वैज्ञानिक विकास सिंह, संगीतकार पंडित अजय चक्रवर्ती, पूर्व न्यायाधीश और राज्यपाल श्यामल सेन, चित्रकार शुभप्रसन्ना और अन्य मौजूद थे। लेकिन मुख्य आकर्षण शर्मिला टैगोर और सौरव गांगुली थे।
राष्ट्रगान के साथ हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष सत्यम राय चौधरी ने की। उद्घाटन राष्ट्रगान के साथ हुआ और उसके बाद अजय चक्रवर्ती द्वारा श्लोक गीत गाया गया। तब उद्घाटन भाषण में निवेदिता विश्वविद्यालय के आचार्य सत्यम राय चौधरी ने कहा कि बंगाल के जिस साहित्य और संस्कृति की शुरुआत रवींद्रनाथ ने दुनिया में की थी, उसे आगे भी कायम रखा जाना चाहिए। कोरोना काल को छोडक़र हर साल सत्यंबाबू ने विदेशों में बंगाली संस्कृति की पहल की।
वैज्ञानिक विकास सिंह ने कहा, आनंद बोस दयालु हृदय वाले, संस्कृति के प्रति रुचि रखने वाले अत्यधिक गुणी व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा, विज्ञान और साहित्य के बीच कोई विरोध नहीं है।
रवींद्रनाथ के परिवार की शर्मिला खंती ने एक भी अंग्रेजी का उच्चारण किए बिना प्रामाणिक बंगाली में अपने साहित्यिक अनुभव की बात की। सौरव को याद नहीं आ रहा था कि इससे पहले किसी ने उन्हें बांग्ला बोलते हुए कब देखा था।
अंतिम वक्ता राज्यपाल थे। बेदाग साहित्य पर उनका भाषण और बंगाली साहित्य से विश्व साहित्य पर उनकी पकड़ उल्लेखनीय है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के साथ कहा, यह सोनार बांग्ला है। बंगाल जो आज सोचता है, कल दुनिया वही सोचती है।
100 पहले हुआ था निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन
आज से 100 साल पहले रवींद्रनाथ ने वाराणसी में 'निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन' (Nikhil Bharat Bang Literary Conference) का उद्घाटन किया था। कविगुरु मूल रूप से पूरी दुनिया में बंगालियों को एकजुट करना चाहते थे। सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी कोलकाता में रविवार को शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। यह इस विश्वविद्यालय के परिसर में तीन दिनों तक चलेगा।
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Published on:
25 Dec 2022 11:24 pm
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