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पश्चिम बंगाल की जूट मिलों में 15 मार्च तक टली हड़ताल

पश्चिम बंगाल में जूट मिल श्रमिकों की वेतन वृद्धि सहित 22 सूत्री मांगों को लेकर 1 मार्च से प्रस्तावित बेमियादी हड़ताल 15 दिनों तक टल गई। श्रमिकों के हितों में विचाराधीन चार्टर ऑफ डिमाण्ड पर मंगलवार को श्रम मंत्री मलय घटक के कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक के दौरान यह फैसला किया गया।

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पश्चिम बंगाल की जूट मिलों में 15 मार्च तक टली हड़ताल

जूट मिलों में 15 मार्च तक टली हड़ताल

- श्रम मंत्री की अपील पर नरम पड़ी श्रमिक यूनियनें
कोलकाता.

जूट मिल श्रमिकों की वेतन वृद्धि सहित 22 सूत्री मांगों को लेकर 1 मार्च से प्रस्तावित बेमियादी हड़ताल 15 दिनों तक टल गई। श्रमिकों के हितों में विचाराधीन चार्टर ऑफ डिमाण्ड पर मंगलवार को श्रम मंत्री मलय घटक के कार्यालय में त्रिपक्षीय बैठक के दौरान यह फैसला किया गया। सीटू समेत 21 ट्रेड यूनियनों ने राज्य की जूट मिलों में बेमियादी हड़ताल की घोषणा की है। जूट उद्योग में श्रमिकों के विभिन्न मुद्दों पर तीसरी बार त्रिपक्षीय बैठक हुई। श्रम मंत्री घटक ने वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आंदोलनकारी यूनियनों से हड़ताल टालने का अनुरोध किया। जिसे सीटू समेत 22 यूनियनों ने मान लिया। इससे पहले बैठक में उपस्थित राज्यसभा सांसद तथा तृणमूल इंटक की नेता दोला सेन ने एक तरफ हड़ताल की घोषणा और दूसरी ओर त्रिपक्षीय बैठक पर आपत्ति जताते हुए बैठक से बाहर निकल गर्इं। सांसद का समर्थन करते हुए नेशनल फेडरेशन ऑफ जूट वर्कर्स (एनएफजेडब्ल्यू) और एनएफआईटीयू के प्रतिनिधि भी बैठक से बाहर चले गए। दोला ने कहा कि आंदोलनकारी यूनियनें पहले हड़ताल की राह छोड़े फिर सरकार के समक्ष त्रिपक्षीय बैठक की बात करे। इस मुद्दे पर 18 और 22 फरवरी को श्रम मंत्री घटक के चेम्बर में मिल मालिकों तथा समस्त श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हो चुकी है। पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। जूट मिल मालिकों और श्रमिक यूनियनों के बीच के गतिरोध को दूर करने के लिए श्रम मंत्री एक बार फिर बुधवार को चर्चा करने की बात कही है। सीटू समर्थित बंगाल चटकल मजदूर यूनियन के प्रदेश महासचिव तथा पूर्व श्रम मंत्री अनादि साहू ने पत्रिका को बताया कि सरकार के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी है। श्रम मंत्री की अपील पर हमने दो सप्ताह यानी 15 मार्च तक हड़ताल स्थगित कर दी है।

इधर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अर्जुन सिंह ने बताया कि राज्य सरकार जूट श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं करेगी। जूट उद्योग पर चार्टर ऑफ डिमाण्ड के एक-एक मुद्दे पर त्रिपक्षीय बातचीत के बाद निर्णय लिए जाएंगे। उनके अनुसार जूट उद्योग में करीब २.५ लाख श्रमिक कार्यरत हैं। सरकार ने पिछले 17 जनवरी को 70 रु. की अंतरिम राहत देने का फैसला किया था और जब तक कि एक नया वेतन समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाता है तब तक श्रमिकों का वेतन 327 रु. प्रतिदिन करने के लिए कहा था।
सहमति बनने की उम्मीद-

सीटू नेता ने कहा कि यूनियनों ने मुख्य रूप से पांच बिन्दुओं पर अंतरिम निर्णय होने पर आंदोलनकारी यूनियनें लोकसभा चुनाव तक हड़ताल को टाल सकती हैं। श्रम मंत्री की मंगलवार की बैठक में न्यूनतम वेतन 428 रुपए निर्धारित करने श्रमिकों का महंगाई भत्ता (डीए) का प्वाइंट 1.90 रु. से बढ़ाकर 2.50 रु,जूट मिलों में 90:20 के अनुपात में श्रमिकों का स्थायीकरण करने तथा श्रमिकों को अंतरिम राहत के तौर पर 156 रुपए का इजाफा करने जैसे प्रस्ताव रखे गए। जिस पर बुधवार को फिर से चर्चा होने की उम्मीद है।