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13 साल बाद होंगे इन निकायों के चुनाव, सीएम ने दिए संकेत

हावड़ा नगर निगम में वर्ष 2013 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं। हावड़ा नगर निगम और बाली नगरपालिका के विलय तथा बाद में अलग करने से जुड़ी कानूनी जटिलताओं और वार्ड पुनर्गठन के कारण चुनाव प्रक्रिया लगातार अटकी हुई थी।
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कोलकाता

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Rabindra Rai

•

Updated: 22 May 2026, 5:11 PM IST

13 साल बाद होंगे इन निकायों के चुनाव, सीएम ने दिए संकेत

13 साल बाद होंगे इन निकायों के चुनाव, सीएम ने दिए संकेत

पश्चिम बंगाल के इन निकायों के चुनाव 13 साल बाद होंगे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संकेत दिया कि लंबे समय से लंबित हावड़ा नगर निगम और बाली नगरपालिका चुनाव इस वर्ष के अंत तक कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो दिसंबर तक दोनों निकायों में निर्वाचित बोर्ड गठित कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नई सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर गंभीरता से काम शुरू किया गया है। हावड़ा नगर निगम में वर्ष 2013 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं। हावड़ा नगर निगम और बाली नगरपालिका के विलय तथा बाद में अलग करने से जुड़ी कानूनी जटिलताओं और वार्ड पुनर्गठन के कारण चुनाव प्रक्रिया लगातार अटकी हुई थी। सुवेंदु ने भरोसा जताया कि दिसंबर तक लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नगर बोर्डों को हावड़ा नगर निगम और बाली नगरपालिका की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सीट निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

हावड़ा में नागरिक सुविधाओं के विकास पर जोर

हावड़ा में नागरिक सुविधाओं के विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्वच्छ पेयजल, सफाई व्यवस्था, जल निकासी, पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और नगर निकाय संचालित शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की बात कही। एक समन्वय समिति गठित की गई है, जिसकी देखरेख जिलाधिकारी करेंगे और राज्य के नगर विकास विभाग के सचिव उस पर निगरानी रखेंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य और रेलवे प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि हावड़ा जैसे महत्वपूर्ण शहर के विकास में रेलवे की भूमिका अहम है और नई सरकार इस दिशा में सहयोगात्मक रवैया अपनाएगी। पत्रकारों द्वारा तृणमूल नेता अरूप राय के खिलाफ लगे आरोपों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की जांच आयोग करेगा। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जयरमन की अगुवाई में गठित आयोग एक जून से काम शुरू करेगा।

अब सीधे बीएसएफ को सौंपे जाएंगे बांग्लादेशी घुसपैठिए

सुवेंदु अधिकारी ने हावड़ा में आयोजित प्रशासनिक बैठक के बाद अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी अपनी सरकार की सख्त नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में नहीं आने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालत भेजने के बजाय सीमा सुरक्षा बल के हवाले करने की प्रक्रिया अब राज्य में लागू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हावड़ा रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में अवैध घुसपैठियों की पहचान और निगरानी के लिए स्टेशन परिसर में कड़ी चौकसी जरूरी है। पुलिस आयुक्त और आरपीएफ को निर्देश दिया है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के दायरे में नहीं आने वाले किसी भी बांग्लादेशी घुसपैठिये को यदि हावड़ा स्टेशन पर पकड़ा जाता है तो उसे अदालत भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के बाद सीधे पेट्रापोल सीमा अथवा बसीरहाट सीमा चौकी पहुंचाकर बीएसएफ के सुपुर्द करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

प्रत्येक सप्ताह देना होगा ब्यौरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक सप्ताह पकड़े जाने वाले घुसपैठियों की संख्या का ब्यौरा पुलिस महानिदेशक के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजना होगा। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार के आरोपों की जांच के लिए भी पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए तथ्य अन्वेषण दल गठित करने की भी घोषणा की गई।

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