2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ख्वाब गांव में तब्दील हुआ झाडग़्राम का लालबाजार गांव

पश्चिम बंगाल के झाडग़्राम जिले में जंगलों के बीच स्थित लालबाजार गांव है। गांव में सभी मकान सुंदर भित्ति से ढके हुए हैं। इन्हें स्थानीय आदिवासी लोगों ने चित्रित किया है। इसके चलते यह एक अहम पर्यटक स्थल के रूप में तब्दील होता जा रहा है। यह सुंदर गांव ख्वाब गांव यानी सपनों का गांव के नाम से पहचान रखता है।

2 min read
Google source verification
ख्वाब गांव में तब्दील हुआ झाडग़्राम का लालबाजार गांव

ख्वाब गांव में तब्दील हुआ झाडग़्राम का लालबाजार गांव

हर घर की दीवार पर बने हैं आकर्षक भित्ति चित्र
लोधा जनजाति के लोग दिला रहे पहचान
हर भित्ति चित्र दे रहा है कोई न कोई संदेश
दीनदयाल कोली
कोलकाता.
पश्चिम बंगाल के झाडग़्राम जिले में जंगलों के बीच स्थित लालबाजार गांव है। गांव में सभी मकान सुंदर भित्ति से ढके हुए हैं। इन्हें स्थानीय आदिवासी लोगों ने चित्रित किया है। इसके चलते यह एक अहम पर्यटक स्थल के रूप में तब्दील होता जा रहा है। यह सुंदर गांव ख्वाब गांव यानी सपनों का गांव के नाम से पहचान रखता है। लालबाजार के ग्रामीण वन उत्पाद संग्राहक, किसान और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी थे लेकिन उनके कलात्मक भित्ति चित्र कई पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
गांव के लोग लोधा समुदाय से हैं। उनकी रचनात्मक समझ रोमांचित कर देती है। वे मूर्तिकला और पेंटिंग में निपुण है। इनता ही नहीं, वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस ज्ञान से गुजरते हैं। बच्चे यहां बहुत जल्द सीखते हैं। वे कला के हरेक पहलू को सहजता से जानते हैं। ग्रामीण व वंचित समुदायों के विलुप्त कला रूपों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयासरत चलचित्र अकादमी ने तीन साल पहले 2018 में लालबाजार में उनके साथ काम करना शुरू किया था।
हर साल पुन: सज्जित की जाती है पेंटिंग्स
चलचित्र अकादमी के संस्थापक व कलाकार मृणाल मंडल ने बताया कि यह गांव आदिवासी बस्ती की तरह दिखता था जिसमें छतवाले मिट्टी के घर थे। लगभग 80 लोग थे जिन्होंने दैनिक श्रम और खेती से बहुत कम पैसा कमाया था। जब पहली बार यहां आया था तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता ने मंत्रमुग्ध कर दिया था। यहां जंगल के अलावा कुछ भी नहीं है। सबसे पहले यहां के बच्चों के लिए एक कार्यशाला रखी गई जिसमें इको प्रिंट, वनस्पति डाई, पेटाचिट्रा, जली हुई मिट्टी के बर्तन आदि कला रूप सिखाए गए। सीखने के बाद उन्होंने अपने घरों के बाहरी हिस्से पर भित्ति चित्र बनाने शुरू कर दिए। पिछले तीन वर्ष में गांव के सभी घरों को रंगीन दीवार कला से चित्रित किया गया है। मिट्टी के घरों की दीवारों को हर साल पुन: सज्जित किया जाता है।
--
तस्वीरें कैद करने से पहले देना पड़ता है दान
अक्सर देखा जाता है कि सैलानी किसी भी पर्यटक स्थल पर पहुंचने के बाद अपने कैमरे या मोबाइल फोन से तस्वीरें कैद करने लगते हैं। कई ऐसे भी स्थल हैं जहां तस्वीरें लेने की मनाही होती है। लेकिन यहां पर तस्वीरें लेने के संबंध में एक नोटिस बोर्ड लगा रखा है। जो भी पर्यटक तस्वीरें कैद करना चाहता है उससे दान मांगते हैं। यह स्वैच्छिक है और इसकी कोई राशि भी निर्धारित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की मदद करना है।
--
सशक्त बनाना ही उद्देश्य
मंडल का कहना है कि हमारा उद्देश्य ख्वाब गांव को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना नहीं है बल्कि स्थानीय लोगों को सशक्त बनाना हैं ताकि वे अपनी कला के माध्यम से जीविका चला सकें। कई लोग पहले से ही कांथा, इको-पेंटिंग और बैटिक बनाना सीख रहे हैं। हम उन्हें ऐसे चैनलों से परिचित करा रहे हैं जिनके माध्यम से वे अपने काम बेच सकते हैं।
गांव में कलाकार स्टूडियो बनाने की योजना
जोगेश माइम एकेडमी के साथ मिलकर ग्रामीणों को चूने की कला भी सिखाई है। अब लालबाजार में एक कलाकार ने स्टूडियो बनाने की योजना बनाई है ताकि अन्य गांवों और शहरों के कलाकार भी लालबाजार में जाकर रह सकें और कला सीख सकें।
पश्चिम बंगाल के झाडग़्राम जिले में जंगलों के बीच स्थित लालबाजार गांव के एक घर की दीवार पर कलात्मक भित्ति चित्र, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।