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लोकसभा चुनाव : आखिर क्या चाहती है आज की युवा पीढ़ी ? पढें और जाने…

- लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में भागीदार को बेताब हैं युवा पीढ़ी। बोले सरकार कोई भी आए बेरोजगारी हो दूर, देश व महिला सुरक्षा के साथ समझौता नहीं समाधान चाहिए।

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Kolkata, Kolkata, West Bengal, India

लोकसभा चुनाव : आखिर क्या चाहती है आज की युवा पीढ़ी ? पढें और जाने...

कोलकाता. देशभर में इस बार 1.5 करोड़ नए मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में भागीदार बनने को बेताब हैं। इसमें सर्वाधिक नए मतदाताओं की संख्या, (20.1 लाख) पश्चिम बंगाल में है। 18-19 वर्ष के उम्र वाले मतदातओं में पहली बार अपने अधिकार का इस्तेमाल करने को लेकर काफी उल्लास देखने को मिल रहा है। उन्हें इस बात कि खुशी है कि 18-19 साल की उम्र में पहली बार उन्हें कोई फैसला अपनी मर्जी से लेना होगा और उस पर देश का भविष्य निर्भर करता है। एक ओर जहां उनके मन में मतदान देने को लेकर कई तरह की जिज्ञासाएं हैं। वहीं महत्वकांक्षी वर्ग के इन मतादाओं में आने वाली सरकार से बेरोजगारी दूर करने से लेकर, देश व महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार दूर करना आदि जैसे कई अपेक्षाएं हैं, जिसे उन्होंने राजस्थान पत्रिका की टीम के साथ साझा किया है।

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- नई सरकार से उम्मीदें :

1. देश से दूर हो बेरोजगारी की समस्या।

2. बोलने व अभिव्यक्ति की आजादी।

3. भ्रष्टाचार मुक्त हो देश का हर संस्थान।

4. देश व महिलाओं की सुरक्षा के साथ न हो समझौता।

5. सकारी व निजी स्कूल-कॉलेजों में समान हो पठन-पाठन।

6. सरकारी शिक्षण संस्थानों में मुहैया कराए जाए बुनियादी ढांचा।

7. बंगाल के सभी स्कूल और कॉलेजों में हिंदी को मिले प्रमुख स्थान।
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- इनका कहना है :

- सचिन साव(20) छात्र : खुशी है कि देश के अगले प्रधानमंत्री को बनाने में मेरी भी भूमिका रहेगी। देश और राज्य की सरकार की अलग हो सकती है। उनके बीच मतभेद भी सकता है पर इसका प्रभाव देश व समाज के विकास पर नहीं पडना चाहिए। वर्तमान समय में हर वर्ग के छात्र-छात्राएं पढ-लिखकर नौकरी पाने के लिए चप्पल घीस रहे हैं, उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही है। नई सरकार को रोजगार बढ़ाना चाहिए। साथ ही पिछले आतंकी हमले को ध्यान में रखते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जाति के आधार पर आरक्षण दूर होने से युवाओं को अपना टैलेंट दिखाने का बेहतर मौका मिलेगा। पिछड़े इलाकों में शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की आवश्यका है।

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- स्वेता ठाकुर(20) छात्रा : देश के लिए काबिल नायक के चयन का मौका मिलने से खुशी है। आशा करती हूं मेरा चयन देश के हित में होगा। नई सरकार को सर्वप्रथम देश में शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना चाहिए। अलग-अलग राज्यों में शिक्षा प्रणाली में अंतर होने से एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले छात्रों को दिक्कत होती है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था में और सुधार लाने की जरूरत है। इसके अलावा महिला सुरक्षा के साथ ही हमारे अभिव्यक्ति अधिकार के साथ छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए।

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- सरबार्थ मुखर्जी(19) छात्र : लोकसभा चुनाव में आगामी 5 वर्षों के लिए देश के भविष्य का फैसला होता है। ऐसे में नई सरकार को पार्टी का मोह छोडक़र देश के हित में जुटना चाहिए। आज का युवा कल का भविष्य है ऐसे में सरकार को युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए निजी व सरकारी शिक्षण संस्थानों में एक समान पढ़ाई होनी चाहिए। साथ ही शिक्षकों और इन्फ्रस्टकचर्स भी एक जैसी मुहैया कराई जाए। सरकारी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने की जरूरत है। मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए सीट बढ़ाना आवश्यक है। युवा वर्ग को हर क्षेत्र में अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।

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- मुकेश काहार(19) छात्र : देश में भ्रष्टाचार की सीमा चरम पर है। नौकरी लेने वाले अभ्यार्थियों से लेकर छात्र-छात्राओं को डोनेशन का सहारा लेना पड़ा रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। नौकरी के साधन बढ़ाने चाहिए। देश की सुरक्षा का ध्यान रखने में सरकार की अहम भूमिका निभानी चाहिए।

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- अंजली केसरी (19) छात्रा : सुदृढ शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी की समस्या का निदान, आदि सामान्य समस्याओं का समाधान के साथ ही महिलाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतेजाम करकना जरुरी है। कोलकाता जैसे महानगर में रहते हुए भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। आए दिन अखबारों में टीवी में रेप, छेडछाड आदि को पढकर परिजन असुरक्षित महसूस करते हैं। चाह कर भी हमें पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिल पाती है। सरकार को इस समस्या का पूर्ण रूप से निदान करना चाहिए। इसके अलावा हम हिंदी भाषा-भाषी को राज्य में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि यहां बांग्ला और अंग्रेजी को अधिक प्राथमिकता मिली है। खासकर स्कूल व कॉलेजों में जो बच्चे बांग्ला या अंग्रेजी में कमजोर होते हैं उनके साथ मतभेद होता है। इसे दूर करने का एकमात्र तरीका है, सभी स्कूलों व कॉलेजों में हिंदा को प्रमुखता देना।