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West Bengal: रसगुल्ले के बाद अब रेशमी कपड़ों के लिए जीआई की लड़ाई में उतरी ममता बनर्जी सरकार

रसगुल्ले का GI Tag के लिए ओडिशा सरकार से कानूनी जंग जीतने के बाद Mamata Banerjee Government अब राज्य के बेहतरीन और आकर्षक Silk कपड़ों का भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) पाने की लड़ाई लड़ने का मन मना रही है।

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West Bengal: रसगुल्ले के बाद अब रेशमी कपड़ों के लिए जीआई की लड़ाई में उतरी ममता बनर्जी सरकार


- भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) के लिए शीघ्र करेगी आवेदन

कोलकाता.
रसगुल्ले का GI Tag के लिए ओडिशा सरकार से कानूनी जंग जीतने के बाद Mamata Banerjee Government अब राज्य के बेहतरीन और आकर्षक Silk कपड़ों का भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) पाने की लड़ाई लड़ने का मन बना रही है। पश्चिम बंगाल में रेशमी कपड़ों का काम पीढ़ी दर पीढ़ी होती चली आ रही है। मुर्शिदाबाद से लेकर उत्तर बंगाल के जिलों में बेहतरीन रेशमी कपड़ों के कारोबार में हजारों की संख्या में परिवार लगे हुए हैं। अत्यंत कोमल और सुंदर कपड़े के उत्पादन का श्रेय लेने के लिए अब पश्चिम बंगाल सरकार ने रेशमी कपड़ों के लिए जीआई टैग के लिए Apply करने का निर्णय लिया है। West Bengal Khadi और Gramodyog विभाग ने यह जानकारी दी है। उल्लेखनीय है कि रेशम की लड़ाई में एक बार फिर ओडिसा से बंगाल का मुकाबला होने की संभावना है। कारण ओडिसा सरकार रेशम कपड़ों की जीआई टैग के लिए आवेदन कर चुकी है। इस संदर्भ में राज्य के MSME तथा Textile मंत्री स्वपन देवनाथ ने पत्रिका के साथ बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (डब्ल्यूबीकेवीआईबी) जल्द ही पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध कपड़े रेशम के लिए भौगोलिक पहचान (जीआई) के लिए संबंधित विभाग के समक्ष आवेदन करेगा। इसके लिए आवेदन की तैयारियां पूरी हो गई है। खादी ग्रामोद्योग विभाग के शीर्ष अधिकारी इस संबंध में सारे कागजात तैयार कर रहे हैं। सदियों से चल रहें इस काम को सर्वोत्तम संभव तरीके से स्थापित करने के लिए सारी प्रक्रियाएं अंतिम चरण पर हैं.
बंगाल के इन जिलों में रेशमी कपड़े होते हैं तैयार-
पश्चिम बंगाल के प्रमुख सात जिलों मुर्शिदाबाद, बीरभूम, नदिया, पूर्व बर्दवान, मालदह, हुगली और पश्चिम मिदनापुर में हैंडलूम के जरिए रेशम के कपड़े तैयार किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध रेशम के कपड़ों की विदेशों में बहुत मांग है। हैंडलूम उद्योग से जुड़े परिवारों की संख्या हजारों में गिनी जाती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर हथकरघा, हस्तशिल्प, शिल्प, भोजन आदि में बंगला के पुरानी पहचान को दुबारा जीवित करने के कोशिशें शुरू की हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर राज्य एमएसएमई विभाग ने रेशम उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई 2015 में प्रोजेक्ट मसलिन शुरू किया है। राज्य सरकार का यह कदम रेशम उद्योग को पुनरुद्धार करने के अलावा देश विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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