
यहां बनते हैं दुश्मनों के दांत खट्टा करने वाले तोप 'सारंगÓ के पुर्जे
कोलकाता.
लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के निकट पहाडिय़ों में छिपे दुश्मनों के दांत खट्टा करने में सफल सारंग तोप के निर्माण में ईशापुर के मेटल एंड स्टील फैक्टरी (एमएसएफ, ईशापुर) की अहम भूमिका रही है। निकट भविष्य में भारतीय सेना को सौंपा जाने वाला तोप सारंग के विभिन्न इस्पात के बने उपक्रमों का निर्माण एमएसएफ, ईशापुर में बड़े पैमाने पर हो रहा है। भारतीय सेना के लिए तैयार विभिन्न तोपों के पाट्र्स ईशापुर में ही तैयार किए जाते हैं।
फैक्टरी के महाप्रबंधक संजय चावला ने सोमवार को पत्रिका के साथ बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सारंग तोप रूसी तोप एम-46 टाउड को रिप्लेस करेगी। जो 1968 से सेना के पास है। इसका कैलिबर 130 एमएम है। सारंग इजरायली तोप सॉल्टम का ही आधुनिक संस्करण है। इसकी कैलिबर 135 अब 155 एमएम की गई है। मार्च 2018 में हुए कई परीक्षणों में इस तोप ने भारत फोर्ज और पुंजलॉयड की तोपों को पछाड़ कर ओपेन बिड में सेना से ऑर्डर हासिल किया था। वर्ष 2022 तक तीन सौ तोपों का निर्माण कर सेना को दिया जाना है।
चावला ने बताया कि देश के 44 ऑर्डिनेंस फैक्टरियों में से करीब 25 फैक्टरियों में रॉ मैटेरियल की सप्लाई ईशापुर एमएसएफ से की जाती है।
स्वच्छता पखवाड़ा पर जागरूकता का संदेश:
महाप्रबंधक ने बताया कि दुश्मनों को शिकस्त देने के लिए तोपों के विभिन्न पाट्र्स तैयार करने के साथ साथ फैक्टरी प्रबंधन के समक्ष स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने का दायित्व है। लोगों को अपने वातावरण को पर्यावरण हितैषी बनाने तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। स्वच्छता पखवाड़े के तहत फैक्टरी के दायरे में रहे इस्टेटों और बाजारों वाले इलाके में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। चावला के अनुसार प्लास्टिक के खिलाफ भी उनका अभियान चलने वाला है। इस अवसर पर एडिशनल जीएम तुलाराम पटेल, पी.के.दास व सुकांत सरकार, संयुक्त महाप्रबंधक आर.डी. बर्मा, वक्र्स मैनेजर रामानुज भट्टाचार्य और वक्र्स मैनेजर (एडमिन) बाप्पादित्य दत्ता उपस्थित रहे।
60 एमएम स्टील रॉड तैयार करने का रिकार्ड:
महाप्रबंधक चावला ने बताया कि देश की पुरानी ऑर्डिनेंस फैक्टरी के रूप में मशहूर एमएसएफ 60 एमएम. स्टील रॉड तैयार करने का रिकार्ड बनाया है। 2018 में भारतीय सेना को मिले धनुष तोप का समस्त स्टील के पाट्र्स बनाकर कानपुर और जबलपुर की फैक्टरियों को भेजा गया। उन्होंने कहा कि पहले हम विदेशों से ये सारे पाट्र्स का आयात करते रहे हैं। वर्तमान में हम इसे पूरी तरह एमएसएफ में बना रहे हैं।
Published on:
16 Dec 2019 10:31 pm
बड़ी खबरें
View Allकोलकाता
पश्चिम बंगाल
ट्रेंडिंग
