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सुंदरवन में मछुआरों को बाघों से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की नई पहल

मछुआरे अक्सर अपनी नावों को तटों पर लगाकर लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जंगल में प्रवेश करते हैं। उनमें से कई बाघों के शिकार हो जाते हैं...

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सुंदरवन में मछुआरों को बाघों से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की नई पहल

सुंदरवन में मछुआरों को बाघों से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की नई पहल

कोलकाता

सुंदरवन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ पश्चिम बंगाल सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। सुंदरवन क्षेत्र में मछुआरों को एलपीजी सिलेंडर लगे छोटे ओवन दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें आरक्षित वन क्षेत्र से जलाने के लिए लकड़ी एकत्रित करने से रोका जा सके। यह जानकारी एक शीर्ष वन अधिकारी ने मंगलवार को दी। मुख्य वन्यजीव वार्डन रविकांत सिन्हा ने कहा कि एक प्रायोगिक परियोजना के तहत उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट ब्लॉक में 100 मछुआरों को एलपीजी से चलने वाले 100 ओवन की आपूर्ति की जाएगी। इस योजना की सफलता के बाद हमारी योजना वन क्षेत्र में अधिक से अधिक मछुआरों तक पहुंच बनाने की है। एक सिलेंडर 12 दिनों तक चल सकता है, आमतौर पर इतना ही समय मछुआरों को एक यात्रा पूरी करने में लगता है। सिन्हा ने कहा कि चूंकि दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव जंगल सुंदरवन में विकल्प सीमित हैं। मछुआरे अक्सर अपनी नावों को तटों पर लगाकर लकड़ी इकट्ठा करने के लिए जंगल में प्रवेश करते हैं। उनमें से कई बाघों के शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द इस प्रथा को रोकना चाहती हैं। यह नयी पहल अगर सफल रही तो मनुष्यों पर बाघ के हमलों की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।

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