
39 साल से कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट से लड़ रहे मालिकाना हक की लड़ाई
अभी तक नहीं मिला न्याय
कृष्णदास पार्थ
कोलकाता . नार्थ पोर्ट ट्रस्ट टेनेंट एसोसिएशन (एनपीटीटीए), काशीपुर के सैकड़ों सदस्य 39 साल से जमीन के मालिकाना हक की लड़ाई कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट से लड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक उनको न्याय नहीं मिला है। अब भाजपा के सांसद दिलीप घोष इनको न्याय दिलाने के लिए पहल कर रहे हैं। दिलीप ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाने और जरूरत पड़ी तो पोर्ट मंत्री से भी बात करने का आश्वासन दिया है। नार्थ पोर्ट ट्रस्ट टेनेंट एसोसिएशन (एनपीटीटीए)" के सदस्य अपनी समस्या को लेकर हालही में भाजपा सांसद से मिले थे। संस्था के सचिव मुन्नी लाल तिवारी, गंगा सागर राय, विभाष मजुमदार, ओम प्रकाश पांडे, कमलेश सिंह, अजय चतुर्वेदी, शत्रुघ्न सिंह, सुरजमणि तिवारी, रामदेव पाठक समेत अन्य सदस्यों ने घोष को अपनी पीड़ा बताई। इनकी बाते सुनने के बाद घोष ने इनकी मांगों को न्यायोचित बताया और आगे की कार्रवाई करने को कहा।
1970 से रह रहे कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर
सदस्यों ने बताया कि 1970 से वे बतौर किराएदार यहां रह रहे हैं। उन्हें सबसे पहले पत्राचार के माध्यम से जमीन आवंटित की गई। जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े पर हम सभी किरायेदार की हैसियत से रह रहे हैं।
1981 में भाड़ा कर दिया दुगना
कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने 1981 में जमीन के भाड़े को दुगना कर दिया। तब सभी किरायेदारो ने नये भाड़े का विरोध किया। उस वक्त पोर्ट ट्रस्ट ने सभी किराएदारों को जमीन से बेदखली का नोटिस दिया। तब सभी किरायेदार अपनी समस्या को लेकर आठवीं लोकसभा याचिका कमेटी के शरण में गए। कमेटी से मांग की गई कि उन्हें जमीन का मालीकाना हक मिले या 1984 के भाड़े ही को लागू किया जो। साथ ही उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी प्रदान की जाए।
दो एकड़ जमीन देने का दिया निर्देश
याचिका कमेटी ने तब सीपीटी के अधिकारियों को निर्देश दिया कि काशीपुर की 11.8 एकड़ जमीन में से 02 एकड़ जमीन इन किरदारों को मानवता के आधार पर दी जाए और इनके लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
केवल वैकल्पिक जमीन ही मिली
याचिका कमेटी के आदेश के बाद पोर्ट ने केवल इन्हें वैकल्पिक जमीन ही दी और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा। इस बीच सीपीटी लगातार मनमने ढंग से भाड़ा बढ़ाते गया। वर्ष 1990 में पोर्ट ने हमारे पास की करीब डेढ़ एकड़ जमीन को (डिस्पोजल लैण्ड) के नाम से राजीस्टरी सेल कर दिया। तब उस समय के चेयरमैन एसी राय के सामने फिर से मालिकाना हक की बात रखी गई। उन्होंने भी आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
2003 में फिर बनी कमेटी
इसके बाद 2003 में इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर 13वीं लोकसभा याचिका कमेटी गठित हुई। किराए दारों की समस्याओं को सुनने के बाद कमेटी ने पोर्ट अधिकारी को आदेश दिया कि संस्था की पुराने समस्याओं को दो महीने के अंदर सुलझाते हुए याचिका कमेटी के पास रिपोर्ट जमा करें। लेकिन इनकी समस्या वर्ष 2023 तक ज्यों की त्यों बनी हुई।
1984 से किरायेदारों को नहीं मिल रहा बिल
सदस्यों का कहना है कि वर्ष 1984 से उन्हें किराए का बिल भी नहीं दिया जा रहा है। किराया बिल के स्थान पर अवैध दखल के नाम पर कम्पेसेशन बिल भेजा जा रहा है। जमीन का भाड़ा नहीं मिलने का आधार बनाकर पोर्ट ट्रस्ट ने सभी किराएदारों पर पी0पी0एक्ट का मामला दर्ज कर दिया है। पुलिस के साथ जमीन को खाली कराने की चेष्टा भी की जा रही है। हमारे दो सदस्यों की जमीन पर कब्जा भी हो चुकी है। इससे अन्य किरायेदार काफी ङ्क्षचतित हैं।
Published on:
03 May 2023 04:02 pm
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