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राज्य सरकार के गर्मी की छु​ट्टी बढ़ाने से अभिभावक चिंतित

पश्चिम बंगाल की ओर से गर्मी को देखते हुए सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को 26 जून तक बंद रखने का फरमान जारी कर दिया गया। सरकार के इस फरमान से सरकारी स्कूल के छात्रों में खुशी की लहर है। लेकिन उनके अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं।

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राज्य सरकार के गर्मी की छु​ट्टी बढ़ाने से अभिभावक चिंतित

सरकार के निर्णय के बाद प्रदर्शन करते अभिभावक।

पश्चिम बंगाल की ओर से गर्मी को देखते हुए सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को 26 जून तक बंद रखने का फरमान जारी कर दिया गया। सरकार के इस फरमान से सरकारी स्कूल के छात्रों में खुशी की लहर है। लेकिन उनके अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। उधर, स्कूलों की छुट्टी बढ़ाने को लेकर मिदनापुर में एसयूसीआई समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर गैर सरकारी स्कूल खुले हैं। गैर सरकारी स्कूलों की ओर से छुट्टियां बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया। राज्य सरकार के इस फरमान को लेकर सरकारी और गैर सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक कुछ भी कहने से इंकार कर रहे हैं। खड़गपुर शहर के दो अभिभावकों से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका गुस्सा फूटा। उन्होंने राज्य सरकार के ओर से जारी फरमान को पूरी तरह से गलत बताया।

भविष्य दांव पर

अभिभावक ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि फिलहाल सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य दांव पर लग चुका है। जिनके पास पैसे है वे बच्चों को गैर सरकारी स्कूल में पढ़कर ऑनलाइन के जरिए शिक्षा हासिल कर रहे हैं। लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने का यह जरिया न के बराबर है। उधर, एक अन्य अभिभावक गोपाल कुमार अग्रवाल ने कहा कि कोरोना काल से ही बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रबावित हुई है। बच्चों का स्कूल जाने में मोहभंग हो रहा है। छुट्टी के कारण बच्चे और स्कूल के बीच एक गहरी खाई बन गई है। इस तरह का फरमान बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना है। राजकुमार ने कहा कि छुट्टी बढ़ाना समस्याओं का हल नहीं है। गर्मी तो अक्टूबर तक रहती है। सरकार को छुट्टी न बढ़ाकर अगर मार्निंग स्कूल खोलने का फरमान जारी करना था जिससे बच्चे शिक्षा हासिल कर पाते।

प्राइवेट स्कूल संचालकों ने नहीं लिया कोई फैसला

सरकार के इस फैसले से हुगली के सरकारी स्कूल के छात्रों में खुशी है। इसके विपरीत प्राइवेट स्कूल खुले हैं। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने छुट्टियां बढ़ाने को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। रिसड़ा विद्यापीठ के प्रधानध्यापक प्रमोद तिवारी ने कहा कि शिक्षा के मामले में छात्र पंगु बनते जा रहे हैं। शिक्षा का स्तर गिर रहा है। पहले कोरोना माहमारी के वजह से शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ा है। छात्रों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया। सरकार को स्कूलों की छुट्टियां नहीं करके अन्य विकल्प तलाशना चाहिए। क्लास को मॉर्निंग या फिर इवनिंग करना चाहिए। ऐसे फैसले से छात्रों का भविष्य अधर में लटक जायेगा। दो तक साल कोरोना महामारी के वजह से छात्र कमजोर हो चुके है। आज देश का भविष्य सडक़ों पर प्रदर्शन कर रहा है। ऑनलाइन एग्जाम की मांग कर रहा है। अगर विकल्प तलाशकर छात्रों को बेहतर शिक्षा और पाठ्यक्रम समय पर पूरा करा दिया जाए तो यही छात्र प्रखरता के शिखर पर होंगे।

मॉर्निंग क्लास पर दें ध्यान

अभिभावक सुषमा सिंह ने कहा कि प्राइवेट स्कूल को भी छुट्टियां नहीं बढ़ानी चाहिए। उन्हें डे क्लास के जगह मॉर्निंग क्लास करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अभिभावक प्रभात गुप्ता ने बताया कि भीषण गर्मी का प्रकोप है बच्चे बेहाल हो रहे हैं। किसी हद तक सरकार का फैसला जायज है। प्राइवेट स्कूल को भी सरकार के निर्देश को मानना चाहिए। खासकर छोटे बच्चों की यानी प्राइमरी क्लास की छुट्टियां देनी चाहिए। अभिभावक सुनील ओझा ने कहा कि पठान पाठन के समय में बदलाव करना चाहिए। सुबह क्लास शुरू कर 12 बजे तक खत्म करे तो परेशानी नहीं होगी। प्राइवेट स्कूल वाले अनहोनी तक मनमानी करते हैं।