-नाट्य जगत में शोक बंगाल में हिन्दी नाटक को एक ऊंचाई प्रदान की, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती रही
कोलकाता. प्रसिद्ध नाट्यकर्मी उषा गांगुली का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वे 75 वर्ष की थी। संगीत नाटक अकादमी अवार्ड विजेता उषा गांगुली ने बंगाल में हिन्दी नाटक को एक ऊंचाई प्रदान की, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती रही है। उन्होंने 1976 में रंगकर्मी नाट्य ग्रुप की शुरुआत की थी। उनके नाटक रूदाली, महाभोज तथा हिम्मत माई खासे लोकप्रिय रहे। उनके परिजनों ने बताया कि गुरुवार की सुबह कोलकाता में ही उन्होंने आखिरी सांस ली। उनका निधन दिल का दौरा पडऩे से हुआ। उनके छोटे भाई राजीव ने बताया कि उषा रीढ़ की हड्डी की समस्या से लंबे वक्त से परेशान थीं। उषा गांगुली का जन्म 1945 में राजस्थान में हुआ था, जबकि उनकी शिक्षा दीक्षा कोलकाता में हुई। रंगमंच में उषा गांगुली के अतुल्य योगदान के चलते उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी मौत की सूचना मिलते ही रंगमंच जगत में शोक की लहर छा गई। कुछ दिनों पहले ही उनके घुटनों का ऑपरेशन हुआ था। इन दिनों वे रंग मंच को लेकर चिन्तित रहा करती थी। गत वर्ष ही आत्मजा नाटक उनके निर्देशन में मंचित हुआ था। एक सप्ताह पहले ही उनके भाई की मृत्यु हुई थी।