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आईएमएफ ने बढ़ाया भरोसा; बंगाल बना पूर्वी भारत का ग्रोथ इंजन

कोलकाता. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर मुहर लगाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान पिछली बार 6.6 प्रतिशत था। घरेलू मांग में मजबूती और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाने […]

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कोलकाता. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की आर्थिक रफ्तार पर मुहर लगाते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह अनुमान पिछली बार 6.6 प्रतिशत था। घरेलू मांग में मजबूती और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाने के झटके को नाकाम कर दिया है। जहां चीन और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों की विकास दर में गिरावट देखी जा रही है, वहीं भारत का आंतरिक बाजार विदेशी व्यापार घाटे की भरपाई कर रहा है। भारतीय निर्यातक अब अमेरिका के बजाय यूरोपीय संघ, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण-पूर्वी एशिया के बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था अब केवल बाहरी देशों पर निर्भर नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने अपने निर्यात को केवल अमेरिका तक सीमित न रखकर अन्य देशों में फैला दिया है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अब केवल बाहरी देशों पर निर्भर नहीं है और घरेलू मांग ही विकास का असली इंजन है। जीएसटी की नई दरों और अनुपालन में सुगमता ने उद्योगों की परिचालन लागत कम कर दी है।

पश्चिम बंगाल: गेटवे टू द ईस्ट की भूमिका

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पश्चिम बंगाल की जीडीपी का अनुमान पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20.31 लाख करोड़ है। बंगाल वर्तमान में देश की कुल जीडीपी में लगभग 6.15 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह तथा ऊर्जा और टेक निवेश प्रमुख उदाहरण है। वहीं राज्य के चमड़ा और कपड़ा उद्योग ने खाड़ी देशों में नए ग्राहक तलाश लिए हैं, जिससे स्थानीय रोजगार सुरक्षित रहा है।

ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल में 'मेक इन इंडिया' का जलवा

वैश्विक व्यापार युद्ध और अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती साबित कर दी है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत न केवल दुनिया की सबसे तेज प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, बल्कि प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा और 3.56 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। यात्री वाहनों की बिक्री में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल में इलेक्ट्रिक वाहन नीति के कारण डानकुनी और खड़गपुर औद्योगिक क्षेत्रों में ऑटो-कंपोनेंट इकाइयों में 12 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। राज्य अब ई-रिक्शा और वाणिज्यिक वाहनों के लिए पूर्वी भारत का प्रमुख हब बन गया है। वहीं दिसंबर 2025 तक, भारतीय आभूषणों का निर्यात अमेरिका के बजाय संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी देशों की ओर 15% अधिक बढ़ा है। बंगाल से हस्तनिर्मित आभूषणों का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 97,156 करोड़ के कुल राज्य निर्यात में एक बड़ा हिस्सा साझा कर रहा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कपड़ा मंत्रालय के लिए 5,272 करोड़ आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष से 19 प्रतिशत अधिक है। रेडीमेड कपड़ों के निर्यात में दिसंबर 2025 में 2.89 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार बंगाल के कपड़ा और होजरी क्षेत्र में पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

पूरे विश्व को भारत से आस है

आज जहां पूरे विश्व को भारत से आस है और वहीं भारत बंगाल की ओर देख रहा है। पश्चिम बंगाल का ट्रेडिंग व्यवसाय दिन प्रतिदिन वृद्धि कर रहा है। बड़ा कंज्यूमर बेस देखकर भारत की बड़ी कंपनियां अपने उत्पाद सबसे पहले बंगाल में बेचना चाहती है। जीएसटी सुधार के पहले यहां दोपहिया वाहनों की कमी थी लेकिन अब अच्छी संख्या में वाहनों की बिक्री हुई है। सुशील पोद्दार - अध्यक्ष, कॉन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशंस

सकारात्मक संकेत

कपड़ा उद्योग के दृष्टिकोण से, यह सकारात्मक संकेत है। बढ़ती आर्थिक रफ्तार से घरेलू मांग में निरंतर वृद्धि होगी, जिससे रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल और फैब्रिक की खपत बढ़ेगी। बंगाल के पूर्वी भारत का ग्रोथ इंजन बनने से जूट, कॉटन और हैंडलूम आधारित उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी, रोजगार सृजन बढ़ेगा और निर्यात में विविधता आएगी। कुल मिलाकर, स्थिर आर्थिक माहौल और क्षेत्रीय विकास कपड़ा उद्योग के लिए निवेश, उत्पादन और बाजार विस्तार के नए अवसर खोलता है।

महेंद्र जैन, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ टेक्सटाइल ट्रेड एंड इंडस्ट्री