
जूट फाइबर
पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक जूट मिले हैं लेकिन जूट फाइबर की आपूर्ति कम होने के कारण अब इसका असर जूट मिलों पर पड़ने लगा है। दरअसल, दक्षिणी हिस्से के जूट उत्पादक जिलों में बारिश की कम मात्रा में हुई है जिसके कारण मिलों को जूट फाइबर की आपूर्ति धीमी हो गई है। हालांकि मिलें 2022-23 सत्र के उत्पादन के लिए कच्चे जूट का भंडार तैयार करने के लिए तैयार हैं लेकिन राज्य के दक्षिणी जिलों में वर्षा की कमी के कारण पौधों की रीटिंग प्रक्रिया बाधित हो गई है। जूट के रेशों को अलग करने की प्रक्रिया को रैटिंग कहते हैं। इन मिलों में जूट उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा जूट के बैग बनाए जाते हैं। प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने के बाद जूट के बैगों की मांग भी बढ़ी है। ऐसे में जूट फाइबर की कमी चिंतनीय है।
तीसरे—चौथे सप्ताह तक देरी का अनुमान
जूट बेलर्स एसोसिएशन के सचिव ए. के. पालित ने कहा कि बाजार में कच्चे जूट की आपूर्ति अभी तक तेजी से शुरू नहीं हुई है। दक्षिण बंगाल में बारिश की कमी के कारण जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह तक इसमें देरी होने का अनुमान है। हालांकि उत्तरी हिस्से में अच्छी बारिश हुई है और वहां से जल्द ही कच्चा जूट आने की उम्मीद है।
प्रमाणीकरण की शुरुआत
इससे पहले सरकार ने जूट उत्पादों के लिए प्रमाणीकरण की शुरुआत की। प्रमाणन से घरेलू बाजार और भारत से जूट उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय कपड़ा सचिव यू पी सिंह ने जूट मार्क इंडिया के लोगो का अनावरण किया।
आश्वासन प्रदान करेगी
राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने एक बयान में कहा कि जूट मार्क इंडिया (जेएमआई) योजना पारंपरिक जूट और जूट उत्पादों के लिए उत्पत्ति स्थल और गुणवत्ता के बारे में सामूहिक पहचान और आश्वासन प्रदान करेगी। इसलिए जेएमआई शक्तिशाली रचनात्मक कार्य की पहचान होगी, जो जूट उत्पाद को गुणवत्ता को परिभाषित करेगी। इसे प्रतिस्पर्धा में अलग पहचान देगी और इसे ग्राहकों के साथ जोड़ेगी।
Published on:
11 Jul 2022 06:46 pm

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