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Howrah Railway Station: देश का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन तरस रहा यात्रियों को

1854 में स्थापना के बाद से हावड़ा से लगातार चलती थी ट्रेनें लॉकडाउन के चलते थम गए ट्रेनों के पहिए हावड़ा स्टेशन पर प्लेटफॉर्म तक वाहन ले जाने की भी सुविधा है पर कोरोना के खौफ के कारण अभी दोनों प्लेटफॉर्म पर यह सेवा बन्द है

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WEST BENGAL: देश का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन तरस रहा यात्रियों को

WEST BENGAL: देश का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन तरस रहा यात्रियों को

शिशिर शरण राही
कोलकाता/हावड़ा. कोरोना काल में भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन हावड़ा यात्रियों की बाट जोह रहा है। 1854 में स्थापना के बाद से हावड़ा से लगातार दिन-रात ट्रेनें चलती थीं। यहां तक कि सेकंड वल्र्ड वार, इमर्जेन्सी में भी कभी ट्रेन बंद नहीं हुई। यहां से 1 दिन में लगभग 200 लोकल और 100 एक्सप्रेस गाडिय़ां रवाना होती थीं। इस साल 22 मार्च को जब कोरोना रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू हुआ तो ट्रेनों के पहिए थम गए और 24 घंटे यात्रियों से खचाखच भरा रहने वाला हावड़ा स्टेशन सूना हो गया। हालांकि अभी कुछ जोड़ी विशेष ट्रेनें चल रही हैं, पर हावड़ा स्टेशन पर आम यात्रियों का प्रवेश बंद है। अब सिर्फ आवश्यक सेवा लोकल ट्रेन और 8 कोविड स्पेशल (3 दैनिक 5 साप्ताहिक) ही चल रही।
स्टेशन पर 23 प्लेटफार्म
2 कॉम्प्लेक्स में 23 प्लेटफॉर्म हावड़ा को भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन बनाते हैं। सावन हो या भादो या दुर्गा पूजा सभी सीजन में प्रवासी राजस्थानी समेत आम यात्री अपने प्रदेश की यात्रा करते थे। लेकिन अभी यात्राओं को विराम लगा है। लॉक डाउन में हजारों प्रवासी राजस्थानियों ने कोलकाता से बस से राजस्थान की यात्रा की। एक श्रमिक ट्रेन से 398 यात्री राजस्थान गए थे।
प्लेटफॉर्म तक वाहन ले जाने की सुविधा
हावड़ा स्टेशन पर प्लेटफॉर्म तक वाहन ले जाने की भी सुविधा है। जो संभवतया पूरे देश में एकमात्र है जहां किराया भुगतान कर मुसाफिर अपनी कार वगैरह ले जा सकते हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 8, 9 और न्यू कॉम्प्लेक्स के 19, 20 नंबर पर ये सुविधा है। 8, 9 नंबर प्लेटफॉर्म के लिए 240 रुपए और 19, 20 के लिए 200 रुपए चार्ज है। दक्षिण पूर्व रेलवे के पीआरओ विधान चंद्र विश्वास ने बताया कि अभी कोरोना के खौफ के कारण दोनों प्लेटफॉर्म पर इस सेवा को बन्द कर दिया गया है।
व्यापार सहित सभी नुकसान
कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी और 7 राज्यंों का प्रमुख व्यापारिक शहर है। रोजाना लाखों व्यापारी मेल एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनों के माध्यम से कोलकाता आते-जाते थे। उत्तर बंगाल के लिए सियालदह से कई ट्रेनें हैं, लेकिन सियालदह स्टेशन भी बंद है। ट्रेनें बंद होने से किसी की यात्रा नहीं हो रही और व्यापार में कोलकाता सहित सभी को नुकसान हो रहा। प्रवासी राजस्थानी अपनी रसोई में राजस्थान के मसाले, पापड़, बड़ी, भुजिया पसंद करते हैं। राजस्थान से आने वाली सिर्फ एक ट्रेन ही चल रही है जिसमें आने वाले पार्सलों से कोलकाता की खपत पूरी नहीं हो पा रही।
अंतिम फैसला रेल मंत्रालय का ही
फिलहाल स्पेशल ट्रेनें ही संचालित हो रही। बाकी दूसरी गाडिय़ा, पैसेंजर या अन्य कब से शुरू होगी इसके बारे में रेल मंत्रालय ही अंतिम फैसला करेगा।
-निखिल चक्रवर्ती, सीपीआरओ, पूर्व रेलवे