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अपनी नई पीढ़ी में नेताजी की यादें जिंदा रखना चाहते हैं परिजन

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतध्र्यान होने के 80 वर्ष बाद देश के लोगों में उनकी स्मृतियां मलीन हुई हैं। उनकी याद में आयोजित होने वाली सामाजिक और सरकारी गतिविधियां घटी हैं। फिर भी उनकी जयंती के अवसर पर 23 जनवरी को कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में रक्तदान शिविर, फुटबॉल और क्रिकेट मैच सहित विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोगों में उनके प्रति आवेग है। लोगों का एक वर्ग अपनी नई पीढ़ी में नेताजी की स्मृतियां जीवंत रखना चाहता है। ऐसे लाखों लोग हर वर्ष अपने परिजनों और बच्चों के साथ महानगर स्थित नेताजी भवन आते हैं। यह उनका पैतृक आवास था और अब यह संग्रहालय है, जहां उनसे जुड़ी स्मृतियां संजोई गई हैं।

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अपनी नई पीढ़ी में नेताजी की यादें जिंदा रखना चाहते हैं परिजन

अपनी नई पीढ़ी में नेताजी की यादें जिंदा रखना चाहते हैं परिजन

नेताजी भवन आते हैं बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक, संग्रहालय में संजोई गई हैं नेताजी से जुड़ी स्मृतियां

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अंतध्र्यान होने के 80 वर्ष बाद देश के लोगों में उनकी स्मृतियां मलीन हुई हैं। उनकी याद में आयोजित होने वाली सामाजिक और सरकारी गतिविधियां घटी हैं। फिर भी उनकी जयंती के अवसर पर 23 जनवरी को कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में रक्तदान शिविर, फुटबॉल और क्रिकेट मैच सहित विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोगों में उनके प्रति आवेग है। लोगों का एक वर्ग अपनी नई पीढ़ी में नेताजी की स्मृतियां जीवंत रखना चाहता है। ऐसे लाखों लोग हर वर्ष अपने परिजनों और बच्चों के साथ महानगर स्थित नेताजी भवन आते हैं। यह उनका पैतृक आवास था और अब यह संग्रहालय है, जहां उनसे जुड़ी स्मृतियां संजोई गई हैं। नेताजी रिसर्च ब्यूरो की ओर से स्थापित इस संग्रहालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार प्रति वर्ष लगभग 10 लाख से अधिक लोग संग्रहालय देखने आते हैं। आगंतुकों में बंगाल के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के होते हैं। उनमें ज्यादातर युवा और बच्चे होते हैं। बच्चे नेताजी के जीवन और उनसे जुड़े प्रसंग के बारे में जानना चाहते हैं।

बच्चे करते हैं तरह-तरह के सवाल

बच्चे अपने अभिभावकों से पूछते हैं कि नेताजी ने कैसे अंग्रेजों की आंखों में धूल झोककर जर्मनी -जापान में प्रवेश किया और विदेश में कैसे भारतीय सेना का गठन किया। अपने 15 वर्षीय पुत्र अर्क और 12 वर्षीय संचिता के साथ नदिया के कृष्णनगर से नेताजी भवन आई तानिया विश्वास ने बताया कि नेताजी ने देश के लिए अपना जीवन खपा दिया। मैं अपने बच्चों को महान देशभक्त के बारे में बताने के लिए यहां लाई हूं। मैं चाहती हूं कि नई पीढ़ी नेताजी को जानें, समझें, देश के लिए उनके बलिदान को अनुभव करें और उन्हें अपना आदर्श बनाएं। दो बच्चों के साथ उत्तर 24 परगना जिले के बारासात से अपनी पत्नी सुजाता के साथ नेताजी भवन आए विश्वजीत भद्र ने बताया कि हमारे समय मेंं नेताजी जयंती को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी नेताजी के बलिदान को सम्मानपूर्वक याद रखें। यह चाहत सिर्फ विश्वजीत और तानिया विश्वास की ही नहीं है, बल्कि वहां आने वाले हर आगंतुक की है।

जयंती, सरकार और पार्टियों के लिए रस्म अदायगी

सरकार और राजनीतिक दलों के लिए नेताजी की जयंती केवल रस्म अदायगी और भाषणों तक सीमित रह गई है। सरकार की ओर से नेताजी के आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया और नहीं कोई कार्यक्रम चलाया गया। वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नेताजी जयंती बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी। केंद्र सरकार ने साल भर उनकी जयंती मनाई, नई दिल्ली के इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित की, उनके नाम की ट्रेन चलाई। दूसरी ओर तृणमूल सरकार ने नेताजी की जयंती को देशप्रेम दिवस घोषित किया। उसके बाद फिर मुद्दा यह ठंडा पड़ गया।