
मुझे या अभिषेक में से एक को चुनें: कल्याण बनर्जी, संकट के बीच तृणमूल सांसद का ममता को अल्टीमेटम
तृणमूल कांग्रेस में जारी संकट के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि मुझे या उन्हें अपने भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा, क्योंकि मुझे अभिषेक का घमंडी रवैया पसंद नहीं है। सांसद ने कहा कि ममता दीदी को समझना होगा कि पार्टी अभिषेक की वजह से इस संकट का सामना कर रही है। मैं अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। कल्याण ने कहा कि मैं दीदी से गुजारिश करूंगा कि अगर आप अभिषेक बनर्जी पर निर्भर रहेंगी तो उन्हीं के साथ रहें, मुझे छोड़ दें, लेकिन अगर आप अभिषेक बनर्जी से अलग हो जाती हैं तो मैं आपके साथ हूं। अभिषेक ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है।
टीएमसी सांसद ने कहा कि अब अंतिम निर्णय ममता बनर्जी को लेना होगा। उनके अनुसार, यदि अभिषेक बनर्जी को नेतृत्व की भूमिका में बनाए रखा जाता है तो उनके लिए पार्टी में बने रहना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि अभिषेक को केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में रखा जा सकता है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके व्यवहार और नेतृत्व शैली को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कल्याण बनर्जी ने कहा कि अब दीदी को तय करना होगा कि वे अपने रक्त संबंध को प्राथमिकता देंगी या उन कार्यकर्ताओं को, जिन्होंने पिछले चार दशकों से पार्टी और उनके लिए संघर्ष किया है। दोनों साथ नहीं चल सकते। अब निगाहें ममता की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वे इस विवाद को किस प्रकार संभालती हैं
कल्याण ने घोषणा की कि वे भविष्य में अभिषेक से जुड़े किसी भी कानूनी मामले में पैरवी नहीं करेंगे। हालांकि वे पार्टी से जुड़े मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, मेरे 45 वर्ष के पेशेवर अनुभव का कोई सम्मान नहीं किया गया। मुझे किसी डस्टबिन या किसी कार्यालय के कर्मचारी की तरह नहीं माना जा सकता। कल्याण ने कहा, अभिषेक की वजह से पार्टी की छवि खराब हुई है। कार्यकर्ताओं और नेताओं को चोर-चोर के नारे सुनने पड़ रहे हैं। कल्याण ने कहा कि वर्ष 2022 में भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अभिषेक के नेतृत्व में पार्टी को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। उन्होंने अभिषेक पर अहंकार और अस्थिर मानसिकता का आरोप लगाया। राजनीतिक गलियारों में कल्याण के बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व को लेकर उभर रहे मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कल्याण बनर्जी को जानकारी मिली कि सीआईडी द्वारा टीएमसी कार्यालयों में की गई तलाशी के मामले में अभिषेक की ओर से अलग याचिका दायर की गई है। कल्याण का आरोप है कि उन्हें इस संबंध में विश्वास में नहीं लिया गया। जबकि वे कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक की ओर से कलकत्ता हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि दोनों मामले आपस में जुड़े हुए थे और उन्होंने अदालत के समक्ष तलाशी अभियान का मुद्दा भी उठाया था। बाद में उन्हें पता चला कि उसी विषय पर अलग याचिका दायर कर दी गई है। कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस बारे में सवाल किया तो उन्हें बताया गया कि यह फैसला ऊपर से मिले निर्देशों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि अभिषेक के पास कई सलाहकार हैं और ऐसे माहौल में काम करना उनके लिए संभव नहीं है।
Updated on:
11 Jun 2026 09:09 pm
Published on:
11 Jun 2026 09:09 pm
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