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आखिर क्या हुआ कि कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया

लगभग 18 लोगों के अब भी अंदर फंसे होने की आशंका है, जो मलबे के भीतर से सेना के संपर्क में हैं। इससे पहले अलग-अलग दावों में मृतकों की संख्या 5 तक और मलबे में दबे लोगों की संख्या 50 से 60 तक होने की आशंका जताई जा रही थी
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आखिर क्या हुआ कि कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया

आखिर क्या हुआ कि कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया

कोलकाता के तारातला में बड़ा हादसा हो गया। तारातला के ब्रेस ब्रिज इलाके में निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर स्थित तीन मंजिला निर्माणाधीन चाय गोदाम की तीसरी मंजिल की छत की ढलाई के दौरान बुधवार दोपहर यह भीषण हादसा हुआ। घटना की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने विभिन्न सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सहयोग से युद्ध स्तर पर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

सीएम बोले, इतने लोगों की गई जान

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि अब तक 21 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, लगभग 18 लोगों के अब भी अंदर फंसे होने की आशंका है, जो मलबे के भीतर से सेना के संपर्क में हैं। इससे पहले अलग-अलग दावों में मृतकों की संख्या 5 तक और मलबे में दबे लोगों की संख्या 50 से 60 तक होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दबे हुए लोगों की सही संख्या की आधिकारिक पुष्टि बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही हो पाएगी।

इस इस बल ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), कोलकाता पुलिस की डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप, सिविल डिफेंस और दमकल विभाग की संयुक्त टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी (एसएमपी) पोर्ट अथॉरिटी की एस्टेट और पोर्ट सिक्योरिटी टीमों के साथ-साथ दमकल गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। विशाल लोहे के ढांचे और बीमों को हटाने के लिए पोर्ट अथॉरिटी व अन्य एजेंसियों द्वारा अत्याधुनिक भारी क्रेन, पांच से छह अर्थ मूवर मशीनों, बुलेट चेन सॉ और गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

तकनीक का व्यापक सहारा लिया

बचाव अभियान को गति देने के लिए तकनीक का व्यापक सहारा लिया जा रहा है। मलबे के भीतर फंसे लोगों की स्थिति और सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों से हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही हाइड्रोलिक सीढ़ियों की मदद से ऊंचाई पर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। मलबे के नीचे दबे मजदूरों की पहचान और उनकी चेतना बनाए रखने के लिए बचावकर्मियों द्वारा बाहर से लगातार उनके नाम पुकार कर उनसे संवाद स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। शाम चार बजे तक मलबे से निकाले गए 12 घायलों को तुरंत एसएमपीए और अन्य एंबुलेंसों की मदद से एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है।

नवान्न से निगरानी और हेल्पलाइन जारी

राज्य सरकार ने इस पूरी आपदा की मॉनिटरिंग के लिए राज्य सचिवालय नवान्न में एक विशेष नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया है। प्रभावित परिवारों और आम जनता की सहायता के लिए प्रशासन ने तुरंत चार हेल्पलाइन नंबर 1070, 8697981070, 033 22143526 तथा 033 22535185 जारी किए हैं।